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अब डेढ़ साल का होगा एमफिल, कई कोर्सेज बदलेंगे नाम

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विश्वविद्यालयों में कोर्सेज के एक जैसे नाम न होने के कारण स्टूडेंट्स का कॅरिअर फंस रहा है। इस कारण विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने सख्त निर्देश दिए हैं कि विश्वविद्यालयों में यूजीसी के नेम कल्चर का पालन किया जाए और कोर्सेज के नाम बदले जाएं।
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वहीं, अब एमफिल डेढ़ साल का करने और होटल मैनेजमेंट व टूरिज्म के कोर्सेज को चार वर्ष का करने पर भी निर्णय लेना है। निर्देश मिलने पर एलयू ने तैयारी शुरू कर दी है।
इसके लिए जल्द ही एकेडमिक व एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक जल्द बुलाई जाएगी। कई बार देखा जाता है कि अलग-अलग नामों से कोर्स चलाने पर राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा को पास करने वाले स्टूडेंट्स शिक्षक बनने के योग्य तो हो जाते हैं पर उनकी डिग्री पर सवाल उठाए जाते हैं।
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इसे गंभीरता से लेते हुए यूजीसी ने यूनिवर्सिटीज को सख्त निर्देश दिए हैं कि कोर्सेज के नाम बदलकर यूजीसी की नाम पद्धति के अनुसार डिग्री अवॉर्ड की जाए।

एलयू भी कर रहा है तैयारी

इधर, यूजीसी से दिशा-निर्देश मिलने के बाद अब एलयू प्रशासन ने तैयारी कर ली है। इस सत्र में जो कोर्स यूजीसी की नाम पद्धति से अलग हैं, उनके नाम मार्क्सशीट पर बदल दिए जाएंगे।

लखनऊ विश्वविद्यालय करीब एक दर्जन से अधिक कोर्सेज के नाम बदलेगा। यूजीसी के सेक्रेटरी प्रो. जसपाल एस संधू के अनुसार नाम पद्धति से इतर चलाए जा रहे कोर्स मान्य नहीं होंगे।

इसके लिए यूनिवर्सिटीज को कई बार निर्देश दिए गए हैं लेकिन अब इसका गजट कर दिया गया है। ऐसे में अगर विश्वविद्यालयों ने नियमों का पालन नहीं किया तो स्टूडेंट्स के भविष्य की पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।

एलयू के प्रवक्ता प्रो. एनके पांडेय ने कहा कि इस सत्र में कई पाठ्यक्रमों के नाम बदले जाएंगे। मुख्य व सेमेस्टर परीक्षा के अभी जो रिजल्ट घोषित होंगे, उनकी मार्क्सशीट पर यूजीसी की नाम पद्धति के अनुसार ही नाम होगा।

अभी जो स्टूडेंट्स मॉस्टर्स ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (एमजेएमसी) नाम से कोर्स पढ़ रहे हैं, उनकी मार्क्सशीट पर अब एमए इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन लिखा जाएगा।
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ये होंगे नए नाम

इसके बाद यह कोर्स यूजीसी के नियमों के अनुसार मान्य कोर्स की श्रेणी में आएगा। वहीं, एमपीएच कोर्स का नाम एमए इन पब्लिक हेल्थ, मॉस्टर्स इन कम्युनिटी मेडिसिन इन योगिक साइंस कोर्स का नाम एमए इन कम्युनिटी मेडिसिन एंड योगिक साइंस होगा।

आर्ट्स फैकल्टी में जो कोर्स चलेंगे, उनके नाम के आगे एमए लगाना अनिवार्य होगा, कॉमर्स फैकल्टी में जो कोर्स चलेंगे उनमें एमकॉम लगाना व साइंस फैकल्टी के कोर्स के आगे एमएससी लगाना अनिवार्य होगा।

इसी तरह करीब एक दर्जन कोर्सेज के नाम बदले जाने की तैयारी की जा रही है। वहीं, एलयू सहित सभी यूनिवर्सिटीज में अब एमफिल का कोर्स डेढ़ साल का होगा। एलयू में एमएससी इलेक्ट्रॉनिक्स का कोर्स हमेशा विवादों में रह है, कारण कि यह यूजीसी के नियमों के अनुसार अर्ह नहीं है।
 
एमफिल कोर्स को एक साल की बजाय डेढ़ साल करने पर भी अंतिम मुहर एकेडमिक काउंसिल व एग्जीक्यूटिव काउंसिल लगाएगी। फिलहाल, यूनिवर्सिटी में अभी इसे लेकर एक समान राय बनाना होगा।
 
इसके पक्ष व विपक्ष में अलग-अलग तर्क दिए जा रहे हैं। वहीं, होटल मैनेजमेंट और टूरिज्म के स्नातक स्तरीय कोर्स अब तीन साल की बजाए चार साल के हो जाएंगे। बैचलर इन होटल मैनेजमेंट व बैचलर इन टूरिज्म एंड ट्रेवल मैनेजमेंट कोर्स अब चार साल का होगा।
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