उत्तराखंड के सरकारी कॉलेजों में ही एनसीटीई के नियमों को ताक पर रखा जा रहा है।
कॉलेजों में नियमित शिक्षकों की लंबे समय से कमी बनी हुई है, लेकिन यहां संविदा पर तैनाती दी जा रही है, वह भी दाखिले पूरे होने के बाद। प्रदेश में कुल 16 सेल्फ फाइनेंस सरकारी बीएड कॉलेज हैं।
शिक्षकों के 40 प्रतिशत से भी ज्यादा पद खाली
इनमें से आठ गढ़वाल और आठ कुमाऊं मंडल में स्थित हैं। जानकारी के मुताबिक इन कॉलेजों में शिक्षकों के 40 प्रतिशत से भी ज्यादा पद खाली हैं।
नेशनल काउंसिल फॉर टीचिंग एजूकेशन (एनसीटीई) के नियमों के मुताबिक कोई भी कॉलेज संविदा पर शिक्षक नहीं रख सकता है। लेकिन कॉलेजों की ओर से भेजे जाने वाले नियुक्ति प्रस्ताव को मंजूरी देने के बजाय संविदा पर शिक्षक रखे जा रहे हैं।
इन कॉलेजों में नियुक्ति का दारोमदार सरकार पर होता है। विवि सिर्फ नियुक्ति को अपना अप्रूवल देता है। नियुक्तियों की फाइल आएगी तो निश्चित तौर पर विवि सहयोग करेगा।
- पीएस राणा, कुलसचिव, गढ़वाल विवि
सरकारी सेल्फ फाइनेंस बीएड कालेजों में नियमानुसार संविदा पर शिक्षक नहीं होने चाहिए। लेकिन इन कालेजों में नियमों का उल्लंघन कर संविदा पर तैनाती दी जा रही है। हम इसका विरोध करेंगे।
- सुनील अग्रवाल, अध्यक्ष, सेल्फ फाइनेंस इंस्टीट्यूट एसोसिएशन