इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों में दाखिले के लिए मैनेजमेंट कोटे की सीटों पर हेराफेरी करना आसान नहीं होगा।
यूपीटीयू ने मैनेजमेंट कोटे के तहत निर्धारित 15 प्रतिशत सीटें भरने के लिए पारदर्शी व्यवस्था बनाने की कवायद की है।
वह इन सीटों की मानीटरिंग करेगा। कॉलेजों को हर चरण की काउंसलिंग के बाद सीटों का पूरा ब्यौरा देना होगा।
मुख्य काउंसलिंग के बाद ही कॉलेज मैनेजमेंट कोटे के तहत अपने यहां दाखिला ले सकेंगे।
अगर किसी कॉलेज ने निर्धारित सीटों से अधिक संख्या में दाखिले लिए तो उसके ऊपर जुर्माना भी लगाया जा सकता है और मान्यता भी वापस ले सकती है।
यूपीटीयू से संबद्ध करीब 800 से अधिक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज मैनेजमेंट कोटे के तहत दाखिला लेने में हर बार खेल करते हैं।
कॉलेज अधिक फीस वसूलकर स्टूडेंट्स को सीधे दाखिला देने का लालच देते हैं और मैनेजमेंट कोटे के तहत करीब 50 प्रतिशत तक सीटें भर लेते हैं। मगर अब ऐसा नहीं होगा।
काउंसिलिंग में आए महज 63500 स्टूडेंट
यूपीटीयू में दाखिले के लिए करीब 2.18 लाख सीटें उपलब्ध हैं। इस बार यूपीटीयू द्वारा इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों में दाखिले के लिए आयोजित हुई राज्य प्रवेश परीक्षा (एसईई) में करीब 1.82 लाख से अधिक स्टूडेंट्स ने क्वालीफाई किया है।
काउंसलिंग के माध्यम से दाखिला लेने के लिए महज 63500 स्टूडेंट्स ने ही रजिस्ट्रेशन करवाया है।
अभी स्पेशल कैटेगरी की काउंसलिंग चल रही है। मगर कॉलेजों में सीटें भरने का खेल शुरू है।
मालूम हो कि बीते साल भी एसईई काउंसलिंग में 54500 स्टूडेंट काउंसलिंग में शामिल हुए थे।
मगर कॉलेजों ने लगभग 2.10 लाख सीटें भरी थी। उसने अधिकतर सीटें सीधे एडमिशन से भर ली थीं।