केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) अब सतत एवं समग्र मूल्यांकन (सीसीई) पद्धति का दायरा सीमित करने जा रहा है। नए शैक्षणिक सत्र (2015-16) से 9वीं और 10वीं कक्षा से सीसीई पैटर्न समाप्त कर पुराने पैटर्न के आधार पर विद्यार्थियों का मूल्याकंन किया जाएगा।
मानव संसाधन मंत्रालय और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के इस फैसले की मुख्य वजह शिक्षा का स्तर नीचे गिरने और मूल्यपरक पढ़ाई नहीं होना बताया जा रहा है।
दरअसल सीबीएसई की कार्यकारिणी ने सीसीई(कंटीन्युअस एंड कॉम्प्रिहेसिव एजूकेशन) में बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया है। जिसे कार्यकारिणी की समिति और एचआरडी मंत्रालय ने भी मंजूरी दे दी है।
सीबीएसई (सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजूकेशन) ने साल 2006 में पहली से आठवीं कक्षा तक सीसीई को लागू किया था। इसे शुरू करने के पीछे वजह विद्यार्थियों में पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रति रुचि बढ़ाना था।
इसके बाद वर्ष 2008 में 9वीं और 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए सीसीई पैटर्न को जोड़ा गया। इसके बाद 2009 से इसे पूरी तरह से लागू कर दिया गया।