उत्तरप्रदेश विकलांग उद्धार डॉ. शकुंतला मिश्रा यूनिवर्सिटी में इंटीग्रेटेड और बहुविकलांगता पर नए कोर्स शुरू किए जाएंगे। इसके अलावा डीफ एंड डम (मूक-बधिर) कॉलेज भी शुरू किया जाएगा।
इसमें पढ़ाई के अलावा उन्हें व्यावसायिक कौशल भी सिखाया जाएगा। मंगलवार को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की सचिव (विकलांगता मामले) स्तुति कक्कड़ ने मोहान रोड स्थित विश्वविद्यालय का दौरा किया।
यहां पर उन्होंने भारतीय पुनर्वास परिषद नई दिल्ली के सहयोग से नए कोर्सेज शुरू करने का प्रस्ताव मांगा। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय को हमारे मंत्रालय की ओर से हर संभव मदद दी जाएगी।
यूनिवर्सिटी में जो नए इंटीग्रेटेड कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है उसमें बीए-बीएड, बीकॉम-बीएड व एमए-बीएड व एमकॉम बीएड शामिल हैं।
बीए-बीएड व बीकॉम- बीएड यह चार वर्षीय कोर्स होंगे और इसमें तीन वर्ष तक तो छात्र अपना कोर्स पढ़ेगा और आखिरी साल में बीएड विशेष शिक्षा का पाठ्यक्रम पढ़ेगा।
इसमें यह भी सुझाव दिया गया कि एमए-बीएड कोर्स में शिक्षाशास्त्र, मनोविज्ञान, अर्थशास्त्र, समाजकार्य व समाजशास्त्र विषयों पर शुरू किया जाए तो और अच्छा होगा।
इसी तरह बीए बहुविकलांगता का कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव तैयार करने का आदेश दिया गया है। इसमें एक साथ कई तरह की निशक्तता के बारे में छात्रों को पढ़ाया जाएगा।
सांकेतिक भाषा के एक्सपर्ट होंगे तैयार
विश्वविद्यालय में डीफ एंड डम (मूक-बधिर) कॉलेज खोला जाएगा। इसमें सांकेतिक भाषा पढ़ाने के लिए एक्सपर्ट तैयार किए जाएं और रिसर्च का काम भी किया जाएगा।
यूनिवर्सिटी ने पहले ही बीए सांकेतिक भाषा के कोर्स को शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया है। यहां साइन लैंग्वेज (सांकेतिक भाषा) सेंटर होगा और इस कोर्स में वे अभ्यर्थी भी दाखिले के पात्र होंगे जिन्होंने किन्हीं कारणों से हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की पढ़ाई नहीं की है।
उन्हें कुछ दिन की बेसिक नॉलेज देकर आगे इस कोर्स में प्रवेश दे दिया जाएगा। केंद्रीय सचिव ने कहा कि यूनिवर्सिटी के पास अच्छे संसाधन हैं और उन्हें इसका बेहतर उपयोग करना चाहिए। यूपी में निशक्तों का पुनर्वास कार्यक्रम बेहतर ढंग से चल जाए तो हम अपने आपको पूरो विश्व में सफल मानेंगे।
ज्यादा किताबों का हो ब्रेलीकरण
स्तुति कक्कड़ ने यह भी सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय में निशक्तता पर कार्यशाला आयोजित कर उनके प्रति लोगों को संवेदनशील बनाया जाए। दृष्टिबाधितों के लिए किताबों का ज्यादा से ज्यादा ब्रेलीकरण किया जाए।
उनके मनोरंजन के साधन विकसित किए जाएं ताकि उनकी सर्जनात्मक ऊर्जा का प्रयोग देश की तरक्की में किया जा सके। भारतीय पुनर्वास परिषद नई दिल्ली के सदस्य/सचिव टीडी धारीवाल ने भी नए कोर्सेज शुरू कर यूनिवर्सिटी को और आगे ले जाने पर जोर दिया।
दौरे में विशेष सचिव (विकलांग कल्याण) अनिल सागर, डॉ. शुकंतला मिश्रा यूनिवर्सिटी के डीन (एकेडमिक्स) प्रो. एपी तिवारी, रजिस्ट्रार एसके श्रीवास्तव, डिप्टी रजिस्ट्रार एके सिंह व असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. बृजेंद्र सिंह मुख्य रूप से मौजूद थे।
स्पाइनल कॉर्ड इंजरी सेंटर बनाने की भी योजना
शकुंतला यूनिवर्सिटी में स्पाइनल कॉर्ड इंजरी सेंटर भी बनाया जाएगा। राजधानी में यह अपने आप में अनूठा केंद्र होगा। यहां पर एक्सीडेंट में स्पाइनल कॉर्ड इंजरी वाले मरीजों का भी इलाज होगा।
यह 30 बेड का अस्पताल होगा। इसमें 25 बेड का खर्च केंद्र सरकार उठाएगी और पांच बेड राज्य सरकार के जिम्मे होंगे। बाकी के खर्चे खुद सेंटर अपनी आय से उठाएगा।
इस सेंटर में रिसर्च भी किया जाएगा। इस बारे में केंद्रीय सचिव स्तुति कक्कड़ का कहना है कि हमने यूनिवर्सिटी से प्रस्ताव तैयार करने को कहा था।
इसे राज्य सरकार के माध्यम से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को भेजा जाएगा। हलांकि, कई और राज्यों से भी इस सेंटर को स्थापित करने का प्रस्ताव आ रहा है लेकिन हम यूपी के बारे में गंभीरता से सोचेंगे।