नीट यूजी काउंसिलिंग के तहत एचआईएचटी जौलीग्रांट की 25 सीटें तो भरी गईं, लेकिन दाखिला पाने वाले छात्रों को फीस में कोई छूट नहीं दी जा रही। अब भारी भरकम फीस को लेकर अभिभावक चिंतित नजर आ रहे हैं। दूसरी ओर, संस्थान का तर्क है कि छात्रवृत्ति दूसरे साल से दी जाती है।
एक अभिभावक ने चिकित्सा शिक्षा मंत्री हरक सिंह रावत को दी शिकायत में कहा कि उनके बच्चे को नीट यूजी काउंसिलिंग से एचआईएचटी में सीट तो मिली, लेकिन फीस मैनेजमेंट सीट के बराबर ली जा रही है। जबकि सरकारी कालेज की तरह यहां बांड भी नहीं भराया जा रहा। मंत्री ने प्रमुख सचिव को मामले पर कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं।
उधर, एचआईएचटी के कुलपति विजयकांत धस्माना का कहना है कि संस्थान में पहले वर्ष में फीस की कोई छूट नहीं होती। दूसरे साल से मेरिट के आधार पर छात्रों को स्कॉलरशिप देते हैं। बताया कि स्कॉलरशिप लेने वालों से पांच साल का बांड भरवाया जाएगा, जो एमबीबीएस के बाद प्रदेश में ही सेवाएं देंगे।
कई छात्रों ने मुंह मोडा
नीट यूजी काउंसिलिंग से एचआईएचटी में सीट पाने वाले सात छात्रों ने भारी भरकम फीस के चलते संस्थान से मुंह मोड़ लिया है। उनका कहना है कि वे कम फीस की हसरत के साथ यहां आए थे, लेकिन इतना खर्चा वहन नहीं कर सकते। खास बात यह है कि फीस को लेकर सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
खबर पर राय देने के लिए यहां क्लिक करें