सीबीएसई, सीआईएससीई और यूपी बोर्ड में नए सत्र का आगाज होने के बावजूद छात्र-छात्राओं को एनसीईआरटी की किताबों के बगैर ही पढ़ाई करनी होगी।
नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) की तमाम विषयों की किताबें बाजार से गायब हो गई हैं।
जिन स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें लगी हैं, उनके विद्यार्थी और परिजन किताबों के लिए शहरभर के चक्कर काट रहे हैं। नौवीं क्लास में हिंदी, गणित, अर्थशास्त्र और भूगोल की किताबें नहीं मिल रहीं हैं।
11वीं-12वीं में बायोलॉजी की किताबें खोजने पर भी नहीं मिल रहीं हैं। छठवीं क्लास में भूगोल, सातवीं में गणित और इतिहास और आठवीं में हिंदी की किताबें छात्र-छात्राओं को उपलब्ध नहीं हैं।
पुरानी किताबों से चलाना होगा काम
बाजार में एनसीईआरटी की कई विषयों की किताबें नहीं मिलने से छात्र-छात्राएं पुरानी किताबों से ही काम चलाने को विवश हैं। सीबीएसई और यूपी बोर्ड से संबद्ध तमाम स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें चलती हैं।
किताबों का सस्ता कोर्स होने से अधिकांश स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें चलन में हैं। ऐसे में किताबें नहीं होने और स्कूल खुलने से विद्यार्थियों को ही परेशानी झेलनी पड़ रही है।
डिमांड बढ़ना व प्रिंटिंग न होना मुख्य वजह
नया सत्र करीब आते ही एनसीईआरटी की किताबों की डिमांड बढ़ जाती है। पहले के ऑर्डर और मांग के आधार पर ही एनसीईआरटी किताबों को प्रिंट कराता है। लेकिन स्कूलों की ओर से सत्र शुरू होने से दो-तीन माह पहले स्थिति स्पष्ट नहीं करने से हर साल परेशानी झेलनी होती है।
कई स्कूल प्राइवेट पब्लिसर्स से बातचीत के चलते ऑर्डर नहीं देते। बातचीत नहीं बनने पर मजबूरन एनसीईआरटी की किताबें चलानी पड़ती हैं।
पीक सीजन में स्कूल देते हैं ऑर्डर, परेशानी
बाजार और स्कूलों की ओर से दिए गए ऑर्डर पर ही एनसीईआरटी की ओर से पुस्तकों की प्रिंटिंग की जाती है। अधिकांश स्कूल पीक सीजन या स्कूल खुलने से पहले ही एनसीईआरटी की पुस्तकों का ऑर्डर देते या फिर डिमांड करते हैं। पीक सीजन में एकाएक एनसीईआरटी द्वारा किताबें उपलब्ध कराना संभव नहीं हो पाता। इससे ही तमाम विषयों की किताबें बाजार में शॉर्ट हो जाती हैं। - गौरव गोयल, पुस्तक विक्रेता, प्रकाश पुस्तक भंडार