देहरादून के एमकेपी पीजी कालेज में चल रहे विवाद में नया मोड़ आ गया है। एमकेपी प्रबंधन समिति की याचिका पर हाईकोर्ट ने डीएम के सभी कालेजों के प्रशासक संबंधी शासन के आदेश को अवैध करार दे दिया।
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अब डीएम सिर्फ एमकेपी पीजी कालेज के ही प्रशासक रहेंगे। बाकी संस्थानों का संचालन प्रबंध समिति करेगी। रविवार को एमआईटी में प्रेस वार्ता में प्रबंध समिति अध्यक्ष अश्विनी कांबोज और सचिव जितेंद्र नेगी ने बताया कि डीएम को प्रशासक नियुक्त करने के शासन के निर्णय के विरोध में उन्होंने तीन सितंबर को नैनीताल हाईकोर्ट में रिट दायर की थी।
दूसरे संस्थानों पर डीएम का अधिकार नहीं
इसमें गुहार लगाई गई थी कि विवाद केवल एमकेपी पीजी कालेज से जुड़ा है तो ऐसे में एमकेपी प्रबंधन समिति से जुड़े एमकेपी इंटर कालेज, महादेवी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, एमकेपी पीजी कालेज हॉस्टल, कालिंदी हॉस्टल और दूसरे संस्थानों पर डीएम का अधिकार नहीं बनता।
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16 सितंबर को मामले पर नैनीताल हाईकोर्ट ने अपना आदेश जारी करते हुए साफ कर दिया कि डीएम को सभी संस्थानों का प्रशासन होने का आदेश अवैध है। डीएम केवल एमकेपी पीजी कालेज के प्रशासन हो सकते हैं। प्रेस वार्ता में डा. अशोक सक्सेना, आरएन मांगलिक, डा. आरएन सिंह, ललित बुड़ाकोटी आदि मौजूद रहे।
भ्रष्टाचार का है विवाद
एमकेपी कालेज में प्राचार्य डा. इंदु सिंह पर प्रबंध समिति ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटा दिया था। डा. किरन सूद कार्यवाहक प्राचार्य रही। जांच के बाद गढ़वाल विवि के कुलपति ने डा. इंदु सिंह को ही प्राचार्य माना। इसके बाद शासन ने जिलाधिकारी को एमकेपी कालेज का प्रशासक नियुक्त कर दिया था। डा. इंदु सिंह ने फिर प्राचार्य पद संभाल लिया है।
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