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...जब 200 विद्यार्थी एक साथ बीमार हो गए

Sat, 16 Nov 2013 11:45 AM IST
सुमित सिंह श्यौराण
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पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) स्थित यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडी (यूआईएलएस) के 200 से अधिक विद्यार्थी एक साथ बीमार हो गए हैं।
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आप भी चौंक गए, लेकिन विद्यार्थियों ने पिछले 2-3 दिनों में लेक्चर से माफी के लिए पीयू हेल्थ सेंटर में कई अविश्वसनीय मेडिकल सर्टिफिकेट जमा कराए है।

पीयू में दो दिन बाद होनी वाली सेमेस्टर परीक्षाओं में लेक्चर से छूट के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट देने के लिए विद्यार्थियों की लाइन लग रही है। इस मामले में इकोनामिक्स, यूबीएस सहित कई आर्ट्स संकाय के विद्यार्थी शामिल हैं।

मरीजों को छोड़ जांच रहे सर्टिफिकेट
एक तरफ पीयू हेल्थ सेंटर गेट के बाहर मरीजों की लंबी लाइन लग रही है तो दूसरी तरफ एक कमरें में मेज पर सैकड़ों की संख्या में मेडिकल सर्टिफिकेट की जांच कर रहे हैं डॉक्टर साहब।
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डॉक्टर भी परेशान आखिर कौन सा काम पहले करें? शनिवार को सारे सर्टिफिकेट वेरीफाई कर विभागों को भेजने का प्रेशर है। इस कारण मरीजों की भी खरी खरी सुननी पड़ रही है।

मेज पर मेडिकल सर्टिफिकेट का ढेर
पिछले दो दिन से पीय कैंपस के हेल्थ सेंटर के कई डॉक्टर मरीजों को छोड़ विद्यार्थियों के मेडिकल सर्टिफिकेट्स की जांच में जुटे हुए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के आदेश पर डॉक्टर यह कर रहे हैं।

छात्र नेताओं और अधिकारियों का दबाव
लेक्चर कम होने पर किसी छात्र को समय पर रोल नंबर नहीं मिला तो उसका साल बर्बाद हो जाएगा।

ऐसे में पीयू छात्र नेताओं से लेकर पीयू के कुछ आला अधिकारी अपने जान पहचान वालों के मेडिकल सर्टिफिकेट की छुट्टी मंजूर किए जाने को लेकर सिफारिश कर रहे हैं।

शुक्रवार शाम करीब 5 बजे भी एक एनएसयूआई नेता अपने कुछ समर्थकों के लिए डॉक्टरों के पास पहुंचे हुए थे।
 
रीढ़ की हड्डी और बुखार पर खेला दांव
अविश्वसनीय तरीके से सर्टिफिकेट्स बनवाने की बात को हेल्थ सेंटरके अधिकारी भी मान रहे हैं। एक डॉक्टर ने माना कि 10 फीसदी सर्टिफिकेट में तो छुट्टी का कोई आधार ही नहीं है।

कुल मेडिकल सर्टिफिकेट में 70 फीसदी पर आब्जेक्शन लगाया गया है। अमर उजाला ने जांच में पाया कि कुछ क्लीनिकों ने विद्यार्थियों को 35 दिन का मेडिकल सर्टिफिकेट बना दिया है।

अधिकतर मामलों में रीढ़ की हड्डी में दर्द या बुखार दिखाया गया है। विभागों में जमा हुए कई विद्यार्थियों के मेडिकल एक ही क्लीनिक से बने हैं।

ये क्लीनिक फेज-7 मोहाली और सेक्टर-22 के हैं। डॉक्टर ने डेंगू की संभावना पर ही एक छात्रा को 2 महीने की छुट्टी लिख दी।

क्या हैं मेडिकल लेक्चर मिलने के नियम
मेडिकल सर्टिफिकेट के आधार पर लेक्चर की छूट को लेकर पीयू प्रशासन की ओर से तैयार नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

बीमार छात्र को क्लास अटेंड करने के एक हफ्ते के भीतर मेडिकल सर्टिफिकेट विभाग में जमा कराना अनिवार्य है। लेकिन, विद्यार्थी दो-तीन महीने बाद लेक्चर कम होने पर फर्जी मेडिकल बनवा कर विभाग में जमा करा देते हैं।
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पीयू हेल्थ सेंटर से अप्रूव होने पर ही मेडिकल सर्टिफिकेट का लाभ मिलता है।

पीयू यूआईएलएल के डायरेक्टर प्रो.संगीता भल्ला ने बताया कि जिन छात्रों ने लेक्चर पूरे करने के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट के साथ आवेदन किया है उन्हें पीयू हेल्थ सेंटर के सीएमओ को रेफर कर दिए हैं। मेडिकल का लाभ सीएमओ द्वारा मंजूरी मिलने पर ही किया जाएगा। विभाग अपने स्तर पर कोई फैसला नहीं करता है।

वहीं, पीयू के चीफ मेडिकल ऑफिसर प्रो.देवेंद्र धवन ने बताया कि बीते तीन दिनों में 350 से अधिक मेडिकल सर्टिफिकेट्स जांच और अप्रूवल के लिए आए हैं।

सर्टिफिकेट की जांच के लिए कुछ समय तो चाहिए। ऐसे में मरीजों की जांच सही तरीके से मुमकिन नहीं है। 10 फीसदी मेडिकल सर्टिफिकेट्स पूरी तरह फर्जी हैं।

विभागों ने 2-3 महीने पुराने मेडिकल सर्टिफिकेट्स भी भेजे हैं। सेंटर इस मामले में नए सिरे से नियम बनाने के लिए चिट्ठी लिखेगा।

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