नौ जनवरी को होने वाले लखनऊ विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पदकों
का मामला एक बार फिर विवादों में घिर गया है।
एमए समाज शास्त्र में
सर्वाधिक 67.7 प्रतिशत अंक पाकर दो गोल्ड मेडल हासिल करने वाली दलित छात्रा
ने विभाग की ओर से उसका नाम चांसलर मेडल के लिए न भेजे जाने का आरोप लगाया
है।
नाराज छात्रा का कहना है कि दलित होने के कारण ही उसका नाम चांसलर
मेडल के लिए नहीं भेजा गया।
उसने अब दोनों गोल्ड मेडल एलयू को वापस करने का
निर्णय लिया है। एमए करने के बाद अब यह छात्रा दिल्ली यूनिवर्सिटी से
एमफिल कर रही है।
इस बीच विभागाध्यक्ष ने
इस तरह के सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि छात्रा ने अपने
स्तर पर खुद कोई प्रयास नहीं किया कि उसे चांसलर मेडल के लिए आवेदन करना
है। हमें तो सिर्फ फॉर्म पर संस्तुति करनी थी।
लखनऊ
विश्वविद्यालय में एमए समाजशास्त्र में सर्वाधिक 67.7 प्रतिशत अंक पाने
वाली दलित छात्रा सीमा चंद्रा ने दो गोल्ड मेडल हासिल किए हैं।
उसे विभाग
में सर्वाधिक अंक हासिल करने के लिए लायंस क्लब ऑफ लखनऊ गोल्ड मेडल और डॉ.
बीएस हैकरवॉल मेमोरियल गोल्ड मेडल मिला है।
छात्रा का आरोप है कि परीक्षा
नियंत्रक प्रो. अकील अहमद की ओर चांसलर गोल्ड, सिल्वर और ब्रांज मेडल के
लिए विभाग के मेधावी स्टूडेंट्स के नाम मांगे गए थे।
प्रो. अहमद ने 29
अक्तूबर को यह पत्र लखनऊ विश्वविद्यालय के सभी संकायों के डीन, प्रोवोस्ट,
चीफ प्रोवोस्ट, प्रॉक्टर और चेयरमैन एथलेटिक्स एसोसिएशन को लिखा था और उनसे
26 नवंबर 2013 तक आवेदन मांगे थे। इनमें एक चांसलर गोल्ड मेडल, एक चांसलर
सिल्वर मेडल और दो ब्रांज मेडल हैं।
21
दिसंबर 2013 को इसके लिए साक्षात्कार लिया गया। छात्रा सीमा चंद्रा कहती
हैं कि उन्हें चक्रवर्ती मेडल के आवेदन के बारे में जानकारी थी कि इसे
स्टूडेंट अपने स्तर पर भरेगा तो मैंने इसके लिए आवेदन कर दिया।
बाकी मुझे
यह अंदाजा था कि चांसलर मेडल के लिए विभागाध्यक्ष की ओर से नाम भेजा जाएगा।
मगर जब मैं साक्षात्कार देने पहुंची तो मुझे बताया गया कि चक्रवर्ती गोल्ड
मेडल फॉर सर्विस के लिए ही मेरा आवेदन स्वीकार कर लिया गया है।
चांसलर
मेडल के लिए मेरा नाम विभाग से नहीं भेजा गया है। सीमा कहती हैं कि विभाग
में 22 साल के रिकॉर्ड में मैं ऐसी स्टूडेंट हूं जिसका दिल्ली यूनिवर्सिटी
में एमफिल में दाखिला हुआ है।
मगर यहां भेदभाव के चलते मेरी प्रतिभा को
नहीं आंका जा रहा। ऐसे में अब मुझे वर्ष 2012-13 में एमए समाजशास्त्र में
सर्वाधिक अंक पाने के लिए जो दो गोल्ड मेडल नौ जनवरी को मिलने हैं वह मैं
नहीं लूंगी।
उसे विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र लिखकर वापस लौटा दूंगी।
छात्रा ने इसके लिए पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. राजेश मिश्रा और वर्तमान
विभागाध्यक्ष प्रो. राम गणेश यादव को जिम्मेदार माना है।