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MBBS करने की चाह रखने वाले छात्रों को लगेगा बड़ा झटका

Fri, 26 Feb 2016 12:03 PM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
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पेपर लीक के बाद चर्चाओं में आए ऑल इंडिया प्री मेडिकल प्री डेंटल टेस्ट (एआईपीएमटी) का तीन साल पुराना पैटर्न दोबारा लौट रहा है। इससे एमबीबीएस में दाखिला लेने की चाह रखने वालों को झटका लग सकता है।
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की हाल ही में हुई बैठक में तय किया गया है कि पेपर लीक और दूसरे फर्जीवाड़े रोकने के लिए प्री और मेंस परीक्षा का पैटर्न दोबारा लागू किया जाए। इस पर जल्द अंतिम मुहर लगेगी।

देशभर के मेडिकल कॉलेजों की 15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटे की सीटों पर दाखिले के लिए वर्ष 2012 तक एआईपीएमटी प्री और मेंस परीक्षा होती थी। प्री परीक्षा क्वालिफाई करने वाले युवा ही मेंस परीक्षा में शामिल होते थे। वर्ष 2013 में नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) परीक्षा हुई।
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इसके बाद 2014 और 2015 में दोबारा एआईपीएमटी हुई, लेकिन यहां केवल एक परीक्षा ही आयोजित कराई गई। इस साल हुई परीक्षा में पेपर लीक की घटना के बाद सीबीएसई की परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठे। इस नाते हाल ही में हुई बोर्ड की बैठक में तय किया गया कि वर्ष 2016 से दोबारा एआईपीएमटी में दो परीक्षाएं (प्रारंभिक और मुख्य) आयोजित कराई जाएंगी।

इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। इस बैठक में बोर्ड के चेयरमैन व अधिकारियों के साथ ही अलग-अलग राज्यों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। बोर्ड के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि कुछ राज्यों ने इस पर आपत्ति जताई है कि इससे परीक्षा में देरी होगी और फीस ज्यादा लगेगी।

इस पर बोर्ड ने साफ किया है कि परीक्षा शुल्क एक बार ही लिया जाएगा। प्रस्ताव पर अभी अंतिम मुहर लगनी बाकी है। बोर्ड का तर्क है कि दो परीक्षाएं होने से न तो पेपर लीक का खतरा रहेगा और न कोई गलत तरीके से एमबीबीएस का दाखिला पा सकेगा।
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इसलिए हो रहा बदलाव

इस साल रोहतक (हरियाणा) में पेपर लीक होने के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी। इसकी जांच हुई तो 42 ऐसे अभ्यर्थी पकड़े गए जोकि पेपर लीक प्रकरण का हिस्सा थे। इन सभी को बोर्ड ने अयोग्य करार दिया। दोबारा परीक्षा में भी कई गड़बड़ी होने की शिकायतें सामने आई थी।

जैमर भी हो सकते हैं केंद्र पर
बैठक में हर परीक्षा केंद्र पर जैमर लगाने पर भी चर्चा हुई है। हालांकि, कुछ सदस्यों ने इस बात पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि इससे आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी होगी। इस पर अंतिम फैसला नहीं हो पाया।

अधिकतम उम्र सीमा पर भी चर्चा
एआईपीएमटी देने के लिए अधिकतम आयु सीमा 25 वर्ष है। मीटिंग में इस बात भी चर्चा हुई कि अधिकतम उम्र सीमा की बाध्यता खत्म की जाए। मामले में सीबीएसई की ओर से मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया को पत्र भेजा जाएगा।

एआईपीएमटी के संबंध में प्री और मेंस परीक्षा पर चर्चा हुई है। अभी कोई भी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। कई और मुद्दों पर चर्चा चल रही है।
- डॉ. संयम भारद्वाज, ओएसडी, एआईपीएमटी
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