उत्तराखंड तकनीकी विवि (यूटीयू) एमटेक कोर्स के लिए जुगाड़ तकनीक का सहारा ले रहा है। विवि में संविदा शिक्षकों की भरमार है, लेकिन शिक्षण के नाम पर केवल मजाक चल रहा है।
अब तक सिविल की कोई फैकल्टी नहीं
तकनीकी विवि के सुद्धोवाला स्थित नए परिसर में विमैन इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी(डब्ल्यूआईटी) और एमटेक कोर्स साथ चल रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि एक साल पहले सिविल इंजीनियरिंग शुरू करने वाले विवि के पास अब तक सिविल की कोई फैकल्टी ही नहीं थी।
हाल ही में दो शिक्षक संविदा पर नियुक्त किए गए हैं। कंप्यूटर इंजीनियरिंग वाले शिक्षक छात्रों को सिविल इंजीनियरिंग पढ़ा रहे थे। अन्य कोर्स में भी हालात ऐसे ही हैं, कहीं एक या दो शिक्षक हैं तो कहीं शिक्षकों की भरमार है। सभी शिक्षक संविदा पर हैं। पद के हिसाब से अस्सिटेंट प्रोफेसर हैं लेकिन किसी शिक्षक को 49 हजार तो किसी को 30 हजार रुपये का पे स्केल मिल रहा है।
240 छात्रों का भविष्य संकट में
विवि में एआईसीटीई से मिले एप्रूवल के मुताबिक एमटेक वीएलएसआई(वेरी लार्ज स्केल इंटिग्रेटेड सर्किट), पीएस(प्रॉडक्शन सिस्टम), सीएसई(कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग), सीई(सिविल इंजीनियरिंग) और एमई(मैकेनिकल इंजीनियरिंग) में प्रत्येक वर्ष प्रत्येक कोर्स में 24 छात्रों को दाखिला दिया जाता है।
इस वक्त यहां कुल छात्र 240 से ज्यादा हैं। ज्यादातर छात्रों को यह शिकायत है कि उन्हें न तो नियमों के हिसाब से काबिल शिक्षक मिले हैं और न ही कोई पढ़ाता है। जबकि विवि की ओर ये यह कोर्स बतौर विशेषज्ञता शुरू कराए गए थे।
एमटेक के लिए सुविधाएं जुटाई जा रही हैं। सिविल की फैकल्टी की देशभर में कमी है। इसलिए नियुक्ति होने में देर हुई।
- डॉ. एसके गोयल, निदेशक, एमटेक कोर्स