एलयू में गुरुवार को हुई कार्यपरिषद की बैठक में कॉलेजों की मान्यता की जांच के लिए सख्त निर्णय लिया गया, ताकि कोई भी कॉलेज मान्यता लेने में खेल न कर सके।
सिर्फ मान्यता पाने के लिए शिक्षकों की संख्या बढ़ा चढ़ाकर दिखाना और अन्य मानकों को जैसे-तैसे पूरा कर कोर्स शुरू करना अब कॉलेजों को भारी पड़ सकता है।
इसके लिए कार्यपरिषद ने अब सभी संकायों में कॉलेजों की मान्यता के लिए एक पांच सदस्यीय कमेटी के गठन का निर्णय लिया है। इसमें संबंधित संकाय का डीन, कार्यपरिषद का एक सदस्य और तीन शिक्षक शामिल होंगे।
यह कमेटी किसी भी समय कॉलेज का औचक निरीक्षण कर सकती है और यह अपनी रिपोर्ट सीधे कार्यपरिषद को देगी।
कुलपति की ओर से मान्यता के मानकों की जांच के लिए शिक्षकों का जो पैनल अभी तक भेजा जाता था, वह अब नहीं भेजा जाएगा।
कॉलेजों को मान्यता देने संबंधित सभी निर्णय कार्यपरिषद के निर्देश पर गठित की गई यह कमेटी ही करेगी। वहीं, छह डिग्री कॉलेजों को शैक्षिक सत्र 2014-15 से कोर्सेज चलाने की मान्यता दे दी गई।
इसमें तीन कॉलेजों को सशर्त मान्यता दी गई है। दो कॉलेजों के मान्यता संबंधित प्रस्ताव वापस कर दिए गए। इसी के साथ कार्यपरिषद के सप्लीमेंट्री एजेंडे में शामिल चार अन्य कॉलेजों के मान्यता संबंधित प्रस्ताव भी आगे की बैठक के लिए टाल दिए गए।
गुरुवार को एलयू में कॉलेजों की मान्यता संबंधित प्रकरण की जांच के लिए कार्यपरिषद की आपात बैठक हुई। इसमें कॉलेजों की ओर से आए दिन मान्यता के मानकों के साथ खिलवाड़ करने का मुद्दा उठा।
इस पर कार्यपरिषद ने सख्त रूख अख्तियार करते हुए इसकी स्थाई मॉनिटरिंग करने का फैसला किया और कार्यपरिषद की निगरानी में एक कमेटी के गठन का फैसला किया।
मालूम हो कि पिछली बैठक में कार्यपरिषद ने एक तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी, जिसका काम कार्यपरिषद में मान्यता से संबंधित मुद्दों को क्रॉस चेक कर उन्हें बैठक में रखने के लिए हरी झंडी देना है।
इसमें नेशनल पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह, शिक्षा संकाय के प्रो. सारनाथ सिंह और विधि संकाय के डॉ. आनंद विश्वकर्मा शामिल हैं।
अब कार्यपरिषद ने गुरुवार को हुई बैठक में मान्यता के लिए भेजे जाने वाली कमेटी को भी अपनी निगरानी में ले लिया और साल भर में कभी भी जांच करने का निर्णय लिया।
बैठक में इनोवेटिव कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट को बीएड व लाल बहादुर शास्त्री इंस्टीट्यूट को बीकॉम ऑनर्स की मान्यता देने संबंधित प्रस्ताव को वापस कर दिया और अब इसकी दोबारा जांच करवाने के बाद आगे की बैठक में मान्यता से संबंधित फैसला किया जाएगा।
वहीं, रजत कॉलेज ऑफ एजूकेशन एंड मैनेजमेंट को बीएड व भौनवाल कॉलेज ऑफ एजूकेशन को बीएड व गोयल इंस्टीट्यूट को बीबीए व बीसीए की सशर्त मान्यता दी।
कार्यपरिषद के सदस्यों ने कहा कि इन कॉलेजों का दोबारा निरीक्षण करवाकर देखा जाए कि जमीन संबंधित दस्तावेज सही हैं या नहीं। इन कॉलेजों में खेल का मैदान वास्तव में बना है या नहीं यह भी देख लिया जाए।
वहीं, एक्सल लॉ कॉलेज में शिक्षकों की नियुक्ति के मानक पूरे न होने के प्रकरण को भी उठाया गया। इसकी ढंग से जांच कर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। कॉलेजों को स्थाई व अस्थाई संबद्धता वर्ष 2014-15 के लिए दी गई है।
आखिर दो कॉलेजों का नाम क्यों छिपा रहे थे अधिकारी
एलयू में कार्यपरिषद की बैठक में इस बार एजेंडे में एक आश्चर्यजनक पॉइंट था। बैठक में सदस्यों ने जैसे ही एजेंडा लिया, उसमें दो कॉलेजों के मान्यता के विस्तारण संबंधित मामले पर चर्चा करना लिखा था।
इसे देखकर कार्यपरिषद सदस्यों ने आपत्ति जताई। इसके बाद पता चला कि इस कॉलेज का नाम इनोवेटिव कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट और लाल बहादुर शास्त्री इंस्टीट्यूट है।
कार्यपरिषद सदस्यों ने इस प्रस्ताव को वापस कर दिया और दोबारा इसकी जांच करवाने के बाद अगली बैठक में विचार करने का फैसला किया।
इसके अलावा सेप्लीमेंट एजेंडे में शामिल डॉ. आशा स्मृति कॉलेज को बीएड, अर्जुनगंज विद्या मंदिर को बीए, रजत गर्ल्स कॉलेज को एमकॉम प्योर और आजाद डिग्री कॉलेज को मान्यता देने संबंधित निर्णय को भी अगली बैठक के लिए टाल दिया है।
विवेकानंद कॉलेज का पक्ष सुनेगी कार्यपरिषद
कार्यपरिषद की पिछली बैठक में एलएलबी त्रिवर्षीय पाठ्यक्रम के पहले सेमेस्टर में निर्धारित 120 सीटों के मुकाबले 300 सीटों पर स्टूडेंट्स का दाखिला लेने वाले स्वामी विवेकानंद लॉ कॉलेज पर 15 लाख रुपये जुर्माना और मान्यता वापसी का निर्णय लिया गया था।
अब कार्यपरिषद की बैठक में कॉलेज ने अपनी सफाई पेश करने की गुहार लगाई है। इस पर कार्यपरिषद सदस्यों ने कहा कि एक बार इसका पक्ष सुन लिया जाए। बाकी कॉलेज को किसी तरह की राहत मिलेगी ऐसा होना मुश्किल है।
एलयू में जाट आरक्षण को हरी झंडी
कार्यपरिषद की बीती 28 मार्च को हुई बैठक में केंद्र सरकार की ओर से जाटों को आरक्षण दिए जाने के फैसले को लागू करने का प्रस्ताव रखा गया था।
गुरुवार को हुई बैठक में इस प्रस्ताव को पास कर दिया गया। इसका अनुमोदन कार्यपरिषद ने सहर्ष करते हुए लीव इनकैशमेंट की व्यवस्था को भी लागू करने पर अपनी सहमति जता दी है।