पंजाब यूनिवर्सिटी के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल साइंस (यूआईपीएस) में डेढ़ साल से लटकी पड़ी सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति पर पीयू कानूनी राय लेगा और इसके बाद यह मुद्दा दोबारा से सिंडीकेट बैठक में लाया जाएगा। यह फैसला शनिवार को हुई सिंडीकेट की बैठक में लिया गया।
यह मुद्दा सीनेट की 8 दिसंबर को हुई बैठक में सिंडीकेट को रैफर किया गया था। बैठक में छात्रों की पीएचडी की डिग्री मंजूर की गई और 11 शिक्षकों की कंफर्मेशन को मंजूरी दे दी गई।
यूआईपीएस में सहायक प्रोफेसर के पद के लिए जिस उम्मीदवार का चयन हुआ था उसने ज्वाइन करने से मना कर दिया था।
इसके बाद वेटिंग लिस्ट में जिस उम्मीदवार का नाम शामिल था, उसे पीयू प्रशासन ने छह माह के निर्धारित समय में नियुक्ति पत्र नहीं दिया।
सिंडीकेट ने नियमों के खिलाफ इस नियुक्ति में छूट देने से मना कर दिया। सीनेट ने इस फैसले को पलट दिया और उसे दोबारा से सिंडीकेट के पास विचार के लिए भेज दिया था।
यूआईपीएस में सहायक प्रोफेसर पद के लिए हुई नियुक्ति का मामला सिंडीकेट की बैठक में 8 सितंबर, 2012 को मंजूरी के लिए आया था। सिंडीकेट ने इस पद पर हुई डॉ. राज कुमार की नियुक्ति को मंजूरी दे दी।
डॉ. राज कुमार ने ज्वाइन करने के लिए दो बार पीयू से समय मांगा। सात मार्च, 2013 को उन्होंने पीयू को पत्र भेजकर इस पद पर ज्वाइन करने में असमर्थता जता दी।
पीयू प्रशासन ने वेटिंग लिस्ट में शामिल सुरेश थरेजा को तुरंत नियुक्ति पत्र भेजना चाहिए था क्योंकि छह महीने का समय उसी दिन खत्म हो रहा था।
पीयू के नियमों के अनुसार सिंडीकेट की ओर से जो नियुक्ति मंजूर की जाती है वह छह महीने के लिए वैध होती है। पीयू के ऑफिस की गलती के कारण थरेजा की नियुक्ति लटकी हुई है।