देश में इंजीनियरिंग के सबसे कठिन मुकाबले जेईई एडवांस से पार पाने वाले छात्रों के लिए यह काफी मुश्किल काम था।
कठिन और घुमावदार सवालों से जूझने के लिए होनहारों ने अपनी पढ़ाई का तरीका खुद ईजाद किया। किसी ने पढ़ाई में घंटों का हिसाब लगाया तो किसी ने सिर्फ रेगुलर स्टडी से एडवांस का सफर तय किया है।
पूरा हुआ बचपन का सपना
रक्षा विहार निवासी आईआरडीई में टेक्निकल आफिसर अतुल कुमार गुप्ता के बेटे प्रखर गुप्ता ने जेईई एडवांस में 175वीं रैंक हासिल की है।
स्वभाव में बेहद सादे प्रखर का कहना है कि औसतन प्रतिदिन चार घंटे की स्टडी ने उनकी एडवांस की राह आसान बनाई है। प्रखर ने बताया कि उन्होंने बचपन में ही आईआईटी से इंजीनियरिंग का सपना देखा था।
उन्होंने जेईई मेंस में 312वीं रैंक हासिल की थी। एडवांस में 175 रैंक हासिल करने वाले प्रखर अपने स्कोर से संतुष्ट नहीं हैं।
खाली वक्त में टीवी देखने के शौकीन प्रखर आईआईटी के बाद सरकारी नौकरी करना चाहते हैं।
उनका कहना है कि भले ही उन्हें विदेशी कंपनियों का अच्छा पैकेज भी ऑफर मिले, लेकिन वह अपने देश को छोड़कर नहीं जाना चाहते। वह मैकेनिकल इंजीनियरिंग करना चाहते हैं।
टॉपर के टिप्स
- जेईई एडवांस को अपनी तैयारी में 11वीं से ही शामिल कर लें
- प्रतिदिन कम से कम चार घंटे की पढ़ाई जरूरी है
- मॉक टेस्ट देते रहें, इससे परीक्षा की प्रैक्टिस अच्छी बनती है
- टारगेट बनाकर स्टडी करनी चाहिए
घंटे नहीं, माहौल जरूरी
655वीं रैंक पाने वाले वसंत विहार निवासी वैभव गुसाईं का कहना है कि घंटों से ज्यादा यह मायने रखता है कि माहौल कैसा है। अगर आपका दिमाग फ्रेश है तो आप पूरे दिन भी पढ़ सकते हैं।
वह दो साल से आईआईटी में दाखिले की तैयारी कर रहे थे। वैभव के पिता हरीश कुमार ओएनजीसी से रिटायर्ड हैं, जबकि मां लता गुसाईं हाउसवाइफ हैं।
वैभव ने दसवीं में 10 सीजीपीए प्राप्त करने के बाद एशियन स्कूल से 95.4 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं की है। उन्होंने बताया कि वह आईआईटी दिल्ली से मैथमेटिक्स एंड कंप्यूटिंग या आईआईटी कानपुर से इलेक्ट्रिकल करना चाहते हैं।
वैभव ने बिट्स पिलानी में भी 450 में से 429 अंक हासिल कर नया इतिहास रचा था। हालांकि वैभव का रुझान अब आईआईटी पर ही है।
टॉपर के टिप्स
- फिजिक्स जैसे विषय में लॉजिक पर ध्यान देना जरूरी है
- कम टाइम में अच्छी तैयारी के लिए रेफरेंस बुक की मदद लें
- घंटों का हिसाब मायने नहीं रखता, जरूरी है कि दिमाग कितना एकाग्र है
- केमिस्ट्री और मैथ्स से पार पाने के लिए जमकर प्रैक्टिस करने की जरूरत है
...हौसलों से उड़ान होती है
जब मन में कुछ ठान ले तो राह की हर मुश्किल रास्ता बना देती है। उत्तराखंड के दो होनहारों ने भी ऐसे ही हौसले के साथ इंजीनियरिंग के महामुकाबले में बाजी मारी है।
56वीं रैंक लाने वाले पिथौरागढ़ के छात्र ललित मोहन पांडे जहां अक्षम हैं, वहीं मसूरी के 50 प्रतिशत विकलांग छात्र माधव भारद्वाज ने अपनी श्रेणी में 239वीं रैंक हासिल की है।
दोनों का ही सपना कामयाब इंजीनियर बनने का है। ललित ने बताया कि जब वह महज डेढ़ साल के थे, तब उनके पिता का स्वर्गवास हो गया था।
मां भावना पांडे ने ही घर की जिम्मेदारी संभाली है। कई साल पहले उनकी हड्ड़ी में इंफेक्शन हो गया था। इस वजह से वह अपने सहारे से नहीं चल पाते हैं।
उन्होंने बताया कि पहले से ही इंजीनियर बनने का सपना देखा था, जिसके लिए जीतोड़ मेहनत की। वह आईआईटी से सिविल या मैकेनिकल इंजीनियरिंग करना चाहते हैं।
इसके बाद वह सिविल सर्विस क्रैक कर आईएएस बनकर प्रदेश की सेवा करना चाहते हैं। उनका एक बड़ा भाई बीफार्मा की पढ़ाई कर रहा है।
विकलांग श्रेणी में ऑल इंडिया 239वीं रैंक
मसूरी के कैमल्स बैक रोड निवासी माधव भारद्वाज के लिए भी यह दिन खास रहा। शरीर से 50 प्रतिशत विकलांग माधव ने अपनी विकलांग श्रेणी में ऑल इंडिया 239वीं रैंक हासिल की है।
माधव के पिता रामकुमार भारद्वाज लाल बहादुर शास्त्री प्रशिक्षण अकादमी (एलबीएस) से काउंसलर पद से रिटायर्ड हैं। उन्होंने बताया कि वह बचपन से ही डिसेबल है।
उनकी मां माला भारद्वाज हाउसवाइफ हैं। माधव अपने माता पिता की इकलौती संतान है।
पिता चाहते हैं कि जिस एलबीएस में उन्होंने इतने भावी आईएएस, आईएफएस, आईपीएस की काउंसिलिंग की है, वहीं से एक दिन उनका बेटा भी आईएएस बनकर निकले।
इसलिए माधव का अगला मकसद अब आईआईटी कानपुर से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग करने के बाद सिविल सेवा पास करके आफिसर बनना है। आईआईटी में सिविल या मैनिकल लेना चाहते हैं।
आसान नहीं आईआईटी का रास्ता
जेईई एडवांस का परिणाम आने के बाद अब होनहारों के लिए नई चुनौती अपनी मनपसंद ट्रेड और पसंदीदा आईआईटी में दाखिला लेने की है। इसके लिए युवा अपनी रैंक और गत वर्षों का रिकार्ड खंगाल रहे हैं।
लेकिन हर आईआईटी में इंजीनियरिंग ट्रेड के लिए अलग-अलग क्राइटेरिया आता है। ऐसे में दाखिले का रास्ता काफी मुश्किल होता है। खास तौर पर दिल्ली, बांबे, कानपुर और खड़गपुर में मारामारी अधिक रहती है।
अविरल क्लासेज के निदेशक और इंजीनियरिंग एक्सपर्ट डीके मिश्रा ने बताया कि गत वर्षों का रुझान देखें तो करीब 3500 रैंक तक बेहतर ट्रेड मिल सकती हैं।
आईआईटी बांबे में दाखिला पाना सबसे बड़ी चुनौती है, जबकि आईआईटी दिल्ली, खड़गपुर और कानपुर में भी शुरुआती रैंक वाले छात्रों को ही गत वर्ष दाखिला मिला था।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष भी ट्रेड्स का ट्रेंड ऐसा ही रहने की उम्मीद है। अचीवर्ज क्लासेज के सीईओ और आईआईटी रुड़की के गोल्ड मेडलिस्ट मनु पंत का कहना है कि इन चार आईआईटी में दाखिले का हर किसी का सपना होता है।
लेकिन नए आईआईटी को भी कम मानकर नहीं चलना चाहिए। वीआर क्लासेज के एमडी और पूर्व आईआईटीयन वैभव राय का कहना है कि जितनी तेजी से नए आईआईटी इंप्रूव कर रहे हैं, उससे छात्रों को चिंतित होने की जरूरत नहीं है।
आज से करें च्वाइस लॉक
जेईई एडवांस रिजल्ट जारी होने के साथ ही शुक्रवार से ऑनलाइन काउंसिलिंग प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। छात्र 24 जून तक च्वाइस फिल कर सकेंगे।
प्रथम चरण का सीट अलॉटमेंट एक जुलाई को होगा। छात्र आर्किटेक्चर एप्टीट्यूड टेस्ट (आट) के लिए भी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
26 जून को आट होगी, जिसका रिजल्ट 29 जून को जारी कर दिया जाएगा। द्वितीय चरण का सीट अलॉटमेंट 7 जुलाई को होगा।
जो छात्र सीट छोड़ना चाहते हैं, उन्हें प्रोविजनल एडमिशन फीस वापस कर दी जाएगी। यह प्रक्रिया नौ जुलाई से 11 जुलाई के बीच संपन्न होगी। तीसरे चरण की सीट अलॉटमेंट 12 जुलाई को होगा।
यहां भरें च्वाइस : www.jeeadv.iitd.ac.in