दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) की ओर से जेईई (मेन) और जेईई (एडवांस) 2014 के लिए इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा करवाने पर रोक लगाने के लिए दायर याचिका खारिज कर दी।
मुख्य न्यायाधीश जी. रोहिणी और न्यायमूर्ति आरएस एंडलॉ की खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए याचिकाकर्ता से पूछा कि आप पूरे मामले में कैसे प्रभावित हैं।
परीक्षा देने वाले किसी भी छात्र ने याचिका दायर नहीं की। ऐसे में बिना आधार के याचिका पर सुनवाई नहीं की जा सकती।
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याची पुष्पांजलि ने कोर्ट से आग्रह किया था कि सीबीएसई और 16 आईआईटी को जेईई मेन की परीक्षा पुन: एक सप्ताह में करवाने का निर्देश दिया जाए।
साथ ही परीक्षा एक साथ करवाई जाए। जेईई की परीक्षा में अलग-अलग प्रश्न पत्र के सेट और अलग डेट होने से सभी छात्रों को बराबर का मौका नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ हो रहे भेदभाव को रोकने का निर्देश दिया जाए। उन्होंने कहा कि मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा के लिए वर्ष 2012 में एक राष्ट्र एक टेस्ट का प्रस्ताव रखा था।
बाद में आईआईटी को कटऑफ के आधार पर अपनी अलग से परीक्षा लेने की इजाजत दी गई थी। जिसमें से पहले डेढ़ लाख छात्रों को मौका दिया गया था।