प्रदेश लोक सेवा आयोग वर्ष 2017 से नए पैटर्न पर एचएएस की परीक्षा लेगा। ये आईएएस की तर्ज पर होगी। एचएएस की प्रारंभिक परीक्षा का प्रारूप तो नहीं बदलेगा यानी एप्टीट्यूट टेस्ट में अंकों का निर्धारण 200 अंक और सामान्य ज्ञान में अंकों का निर्धारण 200 अंक यथावत रहेगा। केवल ये अंतर होगा कि एप्टीट्यूट टेस्ट अहर्ता के लिए (क्वालीफाइंग) ही होगा।
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इसमें 33 प्रतिशत अंक अर्जित करने जरूरी होंगे। योग्यता सूची में स्थान पाने के लिए सामान्य ज्ञान के प्रश्नपत्र में प्राप्त अंक ही मान्य होंगे। यह जानकारी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष केएस तोमर ने दी है। नए प्रारूप में सामान्य ज्ञान के तीन अनिवार्य प्रश्नपत्रों में हिमाचल प्रदेश से संबंधित इतिहास, परंपरा, संस्कृति, भूगोल, सामाजिक, आर्थिक आदि विषयों के प्रश्नों का 30 से 33 प्रतिशत तक अधिमान तय किया गया है।
इस परीक्षा के माध्यम से चयनित होने वाली युवा पीढ़ी को इस पहाड़ी राज्य के बारे में संपूर्ण जानकारी मिल सकेगी। इससे वे सेवा में आने के बाद राज्य के लोगों की सेवा में कोई कमी नहीं छोड़ेंगे। मुख्य परीक्षा में अंग्रेजी के प्रश्नपत्र 100 अंकों और हिंदी का प्रश्नपत्र भी 100 अंकों का ही होगा। दोनों में अर्हता प्राप्त करने के लिए 40 प्रतिशत अक लेने जरूरी होंगे।
सामान्य ज्ञान के तीन पेपर और एक ऐच्छिक विषय होगा मुख्य परीक्षा में
साक्षात्कार के लिए अर्हता के लिए मुख्य परीक्षा के सामान्य ज्ञान के तीन प्रश्न पत्र प्रत्येक 200 अंक, निबंध 100 अंक और एक वैकल्पिक विषय में अर्जित अंकों का योग ही स्थान तय करेंगे। साक्षात्कार में निर्धारित 150 अंक यथावत रहेंगे।
आयोग के अध्यक्ष केएस तोमर ने इस परीक्षा के लिए प्रस्तावित बदलाव वर्ष 2017 में लागू होगा। पाठ्यक्रम को आयोग की वेबसाइट पर अपलोड करने का मुख्य उद्देश्य यह है कि संबंधित पक्ष जिनमें इच्छुक अभ्यर्थी, शिक्षाविद्, विद्वान, विद्यार्थी, जागरूक नागरिक आदि शामिल हैं, वे नए प्रारूप के सुधार से संबंधित अपने-अपने सुझाव आयोग के कार्यालय को समय पर प्रेषित कर सकेंगे।
सुझावों को ऑनलाइन प्रेषित करने के लिए संबंधित पक्षों की सुविधा के लिए एक नई ई-मेल आईडी suggestions.hppsc@gmail.com तैयार की गई है।
राज्य लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य प्रोफेसर जोगेंद्र चंद शर्मा को पाठ्यक्रम का सूक्ष्म स्तर पर निर्धारण का कार्य सौंपा गया था, परीक्षा संबंधी नमूना प्रश्नपत्र जो प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के लिए उपलब्ध करवाए जाएंगे, उन्हें आयोग की वेबसाइट पर तभी अपलोड किया जाएगा।
इन शिक्षाविदों ने दिया योगदान- प्रो. योगेंद्र वर्मा, प्रो. प्रदीप आहलुवालिया, प्रो. लक्ष्मण ठाकुर, प्रो. बीएस मढ़, प्रो. कमल मनोहर शर्मा, प्रो. ममता मोक्टा, प्रो. कैलाश ठाकुर, प्रो. मोहन झारटा, प्रो. डीडी शर्मा, प्रो. अमृत वर्षा गांधी, प्रो. एमएस बिष्ट, प्रो. एसएस सेन, प्रो. टीसी भल्ला, डा. आरके सूद, प्रो. अपर्णा नेगी, प्रो. जयदीप नेगी, इंजीनियर ओसी हांडा, ओसी हांडा, प्रो. वीपी शर्मा और प्रो. सुरेश कुमार।