फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बदल सकता है सिलेबस, हर चेप्टर के बाद होगा टेस्ट

Fri, 19 Feb 2016 10:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
विज्ञापन
विज्ञापन
नौवीं और दसवीं में सामाजिक विज्ञान की पांच किताबों का बोझ ढोने वाले बच्चों के लिए अच्छी खबर है। इसके अलावा अंग्रेजी के पाठ्यक्रम में भी बदलाव हो सकता है। वहीं बोर्ड की वार्षिक परीक्षाओं में इन दोनों विषयों के प्रश्नपत्रों में नंबरों के सीक्वेंस (क्रम) में भी बदलाव पर चर्चा स्कूल शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष बलवीर तेगटा के साथ हुई बैठक में राजकीय प्रशिक्षित कला अध्यापकों ने की है।
विज्ञापन


वीरवार को तेगटा के साथ हुई बैठक में संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि सामाजिक विज्ञान में बच्चों को इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, नागरिक शास्त्र और आपदा प्रबंधन की कुल पांच किताबें पढ़ाई जा रही हैं। एक ही विषय में इतना अधिक सिलेबस रखने से बच्चों को एक भी विषय ढंग से समझ नहीं आ पाता है। वहीं सामाजिक विज्ञान और अंग्रेजी के प्रश्नपत्रों में नंबरों के सीक्वेंस को ध्यान में नहीं रखा जाता।

ये मांगें भी उठाईं
वहीं संघ ने मुफ्त मिलने वाली पुस्तकों को कलस्टर स्तर तक पहुंचाने, पेपर चेकिंग के दूसरे दिन ही अध्यापकों के मानदेय के भुगतान, 8वीं की परीक्षाएं बोर्ड के माध्यम से करवाने, वरिष्ठ टीजीटी अध्यापकों के नेतृत्व में उड़न दस्तों का गठन और छठी से नौंवी तक के छात्रों की त्रैमासिक परीक्षाओं के अंक वार्षिक परीक्षा के अंकों में जोड़ने सहित अन्य मांगें उठाईं।
विज्ञापन


सरकारी स्कूलों में अब हर चेप्टर के बाद टेस्ट
सरकारी स्कूलों के बच्चे भी अब निजी स्कूलों की तर्ज पर पढ़ाई करेंगे। प्रदेश में पहली से दसवीं तक हर विषय में एक से दो चैप्टर पढ़ाने के बाद बच्चों का टेस्ट लिया जाएगा। इस टेस्ट के परिणाम रजिस्टर में लिखे जाएंगे। हर माह परिणामों के आधार पर बच्चों की समीक्षा की जाएगी। स्कूल एजूकेशन सोसायटी ने सभी स्कूलों में इस व्यवस्था को शुरू करने को कहा है।

सर्व शिक्षा अभियान और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत स्कूलों में पढ़ाई के तरीकों में बदलाव लाने के लिए सरकार ने यह योजना बनाई है। इस प्रक्रिया से पढ़ाई में कमजोर बच्चों की स्थिति स्पष्ट होगी। सुधार लाने के लिए विशेष काम किया जाएगा। बच्चों की परफार्मेंस से अभिभावकों को भी अवगत कराया जाएगा। इसके अलावा बच्चों में पढ़ने की क्षमता को बढ़ाने के लिए पुस्तकालय में रखी सामग्री का भी अधिक से अधिक प्रयोग किया जाएगा।

पहली से आठवीं कक्षा तक हिमाचल में सरकारी स्कूलों के बच्चों की सालाना असेसमेंट होती है। आठवीं तक बच्चों को कक्षा में फेल नहीं किया जाता। हर कक्षा में बिना परीक्षा पास किए जाने के चलते कई बच्चों का बौद्धिक ज्ञान नहीं बढ़ रहा है। इस कमी को दूर करने के लिए स्कूल एजूकेशन सोसायटी ने सरकार को शिक्षा में गुणात्मकता लाने के लिए गाइडलाइन जारी की है। राज्य परियोजना निदेशक घनश्याम चंद ने इसकी पुष्टि की है।
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें