यूजी कक्षाओं में रूसा लागू होने के बाद प्रदेश विश्वविद्यालय पुराने ईयर सिस्टम में यूजी डिग्री करने वाले छात्रों को राहत देने जा रहा है। पुराने ईयर सिस्टम में प्रथम और द्वितीय वर्ष के छात्रों को श्रेणी सुधार का मौका दिया जाएगा। इसकी तैयारी शुरू हो गई है। जल्द ही इस पर फैसला होगा।
इस मौके का लाभ उठाने के लिए डिग्री धारकों को पांच हजार रुपये फीस अदा करनी होगी। एचपीयू के इस फैसले से प्रदेश के हजारों छात्र लाभान्वित होंगे। बीते सत्र में यूजी फाइनल ईयर के छात्रों को यह मौका दिया गया था। ईयर सिस्टम के तहत तीनों संकाय साइंस, वाणिज्य, कला संकाय और आधुनिक भाषा के प्रथम और द्वितीय वर्ष के डिग्री धारक श्रेणी में सुधार कर सकेंगे।
ईयर सिस्टम के तहत 2007-08 शैक्षणिक सत्र से 2014-15 तक के बीच पास आउट छात्र इसके लिए पात्र होंगे। ग्रेजुएशन की डिग्री की डिविजन सुधार कर वे स्नातक के बाद कई कोर्स और रोजगार की शर्तों को पूरा कर पाएंगे। तृतीय श्रेणी में पास छात्र परीक्षा में अच्छे अंक लेकर द्वितीय और द्वितीय श्रेणी में पास छात्र प्रथम श्रेणी में आ सकेंगे। ईयर सिस्टम में यह अंतिम मौका होगा। इसके बाद यूजी में पूरी तरह से रूसा सीबीसीएस लागू होगा।
दो बार दे सकेंगे परीक्षा- इस खास मौके में डिग्री धारकों को सितंबर 2015 और मार्च 2016 की परीक्षाओं में बैठने की अनुमति दी जा सकती है। फैसला लेने के बाद विवि आने वाले आवेदनों के आधार पर ही प्रश्नपत्र और परीक्षा का शेडयूल तैयार करेगा। उम्मीद है कि जल्द विवि इस पर फैसला लेकर अधिसूचना जारी करेगा।
टेट देने वालों को होगा लाभ- श्रेणी सुधार के मौके से सबसे अधिक 40 फीसदी अंक के साथ बीएड डिग्री करने वाले डिग्री धारकों को लाभ होगा। चूंकि, वे यदि 45 फीसदी अंक भी प्राप्त कर लेते हैं तो भले ही उनकी श्रेणी न सुधरे, मगर वे टेट के लिए जरूर पात्र हो जाएंगे। उन्हें कंसोलीडेटिड कार्ड मांगने उपलब्ध करवाया जाएगा।
श्रेणी सुधार में यह होती है प्रक्रिया- परीक्षा के दो मौकों में छात्र यदि अच्छे अंक लेकर श्रेणी सुधारने में कामयाब हों तो ही उन्हें कंसोलीडेटिड मार्क्सशीट जारी होती है, अन्यथा उन्हें सिर्फ उन विषयों की अंक तालिका दी जाती है, जिसमें वे अधिक अंक प्राप्त करते हैं। यह छात्र पर होगा कि वे इन दो वर्षों में किन-किन विषयों की परीक्षा देना चाहते हैं।
छात्र अभिभावकों की मांग पर मौका- विवि के प्रति कुलपति प्रो. राजेंद्र सिंह चौहान और परीक्षा नियंत्रक प्रो. श्यामलाल कौशल ने माना कि इसकी प्रक्रिया जारी है। उम्मीद है कि जल्द कुलपति इस पर अंतिम फैसला लेंगे। कहा कि अंतिम वर्ष के छात्रों को मौका देने के बाद प्रदेश भर से डिग्री धारक और अभिभावक इसकी मांग करते आ रहे हैं।