पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) में वर्षों से नियुक्त अस्थायी या कांट्रेक्ट तौर कर्मचारियों को अब इलाज के लिए पैसा मिल सकेगा।
पीयू ने स्थायी कर्मचारियों की तरह ही अस्थायी कर्मचारियों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस कराने का प्रपोजल तैयार किया है।
22 मार्च को पीयू सीनेट में पीयू नॉन टीचिंग एसोसिएशन प्रधान दीपक कौशिक ने पीयू में कांट्रैक्ट कर्मचारियों को भी मेडिक्लेम इंश्योरेंस पॉलिसी में शामिल करने की मांग की।
पीयू सीनेट के सभी सदस्यों ने इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी है। जल्द ही कुलपति इस मामले में कमेटी गठित कर रिपोर्ट के बाद कार्रवाई करने के लिए संबंधित विभाग को भेज देंगे।
पीयू में 500 से अधिक बी और सी क्लास अस्थायी और कांट्रेक्ट कर्मचारी 10 से 20 सालों से काम कर रहे हैं। लेकिन, उन्हें मेडिक्लेम हेल्थ पॉलिसी के तहत कवर नहीं किया गया है।
इस स्कीम के तहत पीयू में तैनात 200 के करीब अस्थायी सिक्योरटी गार्ड को भी शामिल करने की मांग भी की गई है।
एक अस्थायी कर्मचारी ने गंवाई जान
कुछ समय पहले पीयू के यूसोल में 25 साल से कार्यरत डेली वेजिज कर्मचारी की पैसे की तंगी के कारण मौत हो गई।
उधर, पीयू कुछ रोज पहले ही एक अन्य अस्थायी कर्मचारी की वॉल्व बदलने के लिए पीयू कर्मचारियों ने अपने स्तर पर 2 लाख की मदद की। इस कर्मचारी का आगामी 9 अप्रैल को पीजीआई में आप्रेशन होगा।
14 हजार विद्यार्थियों के हेल्थ इंश्योरेंस
पीयू प्रशासन ने पीयू में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की हेल्थ पॉलिसी अपने स्तर पर कराई गई है। किसी भी हादसे में छात्र की मौत पर अभिभावकों को एक लाख तक की राशि हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत मिलती है। 3-4 साल पहले पीयू कैंपस में सड़क हादसे में एक छात्र की मौत के बाद सभी विद्यार्थियों की हेल्थ इंश्योरेंस कराई गई थी।
विधवा पेंशन का मामला लटका
पीयू प्रशासन की ओर से करीब दो साल से विधवा पेंशन का मामला लटकाया हुआ है। दीपक कौशिक ने सीनेट में यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पीयू प्र्रशासन ने विधवा पेंशन की ऑप्शन एक साल पहले मांगी थी। लेकिन अभी तक इससे शुरू नहीं किया जा सका है। विधवा पेंशन स्कीम शुरू होने से करीब 200 महिलाओं को लाभ मिलेगा।