हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने री-चेकिंग की शर्तों में सख्त बदलाव किए हैं। इससे स्टूडेंट्स को लेने के देने पड़ सकते हैं। नए नियमों के तहत, अब अगर री-चेकिंग में विद्यार्थियों के अंक कम हुए तो उन्हें उन्हीं कम अंकों के आधार पर परिणाम दिया जाएगा। यानी पहले आए अधिक अंक रद हो जाएंगे।
बीते 17 दिसंबर को बोर्ड द्वारा घोषित पहले सेमेस्टर के परिणामों में ऐसे विद्यार्थियों की संख्या 50 प्रतिशत से भी ज्यादा है, जिनके अंक औसत से भी कम हैं। जाहिर है, री-चेकिंग के लिए इस बार बोर्ड को आवेदन भी काफी मिलने वाले हैं। बोर्ड के सचिव पंकज कुमार ने री-चेकिंग के नए नियम जारी करते हुए विद्यार्थियों को सचेत कर दिया है कि जिन्हें पूरा विश्वास है वही विद्यार्थी अपने नंबरों की री-चेकिंग कराएं।
गौरतलब है कि हरियाणा में स्कूली शिक्षा में सुधार के सभी प्रयास नाकाफी साबित हुए हैं। बीते दिनों घोषित हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की सिंतबर-अक्तूबर 2015 की दसवीं की परीक्षा का पास प्रतिशत 38.51 फीसदी रहा। वहीं, बारहवीं की परीक्षा का पास प्रतिशत 65.78 फीसदी है। इसी साल मार्च-अप्रैल में हुए वार्षिक परीक्षा के परिणामों में दसवीं के सिर्फ 41.28 और बारहवीं के करीब 54 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए थे।
सिंतबर में विद्यार्थियों को पूरक परीक्षा की विशेष तैयारी कराने के विभाग के सभी प्रयासों के बावजूद दसवीं का पास प्रतिशत और कम हुआ है। खास बात यह भी है कि दसवीं की पूरक परीक्षा में जो विद्यार्थी पास भी हुए हैं, उनमें से अधिकांश के अंक 50 फीसदी से भी कम आए हैं। केवल बारहवीं कक्षा के पास प्रतिशत पर संतोष किया जा सकता है।
वार्षिक परीक्षा परिणामों के बाद प्रदेश सरकार ने पूर्व कांग्रेस सरकार ने आरोप लगाया था कि ग्रेस नंबरों के बल पर हर साल अच्छा परीक्षा परिणाम लाया जाता रहा और मौजूदा सरकार ने ग्रेस नंबरों की व्यवस्था हटाई तो पास प्रतिशत गिर गया।
शिक्षा के स्तर में सुधार लाने के लिए तब शिक्षा मंत्री ने स्कूल अध्यापकों की गर्मियों की छुट्टियां रद्द कर विद्यार्थियों को सितंबर में पूरक परीक्षा के लिए तैयार करने के निर्देश जारी किए थे, लेकिन सरकार की यह योजना लगभग असफल साबित हुई, जब प्रदेश के अधिकांश स्कूलों में विशेष कक्षाओं में बच्चे नहीं पहुंचे।
आखिरकार सरकार ने अपना फैसला वापस ले लिया। अब पूरक परीक्षाओं के परिणाम में दसवीं में विद्यार्थियों की स्थिति फिर चिंताजनक है। इस संबंध में शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह पूरक परीक्षाएं हैं, लेकिन उन्हें पूरी उम्मीद है कि अगले साल वार्षिक परीक्षा परिणाम बहुत अच्छे आएंगे।