हरियाणा के सरकारी स्कूलों का हाल जानकर आपको हैरानी होगी। 10वीं और 12वीं के पहले सेमेस्टर के रिजल्ट में एक भी बच्चा पास नहीं हुआ। इस परीक्षा परिणामों ने शिक्षा विभाग के दावों की पोल खोलकर रख दी है। इस बार करनाल जिले में दसवीं कक्षा के प्रथम सेमेस्टर का परीक्षा परिणाम 30 फीसदी से कम रहा है।
वहीं, जिले के 11 स्कूलों में दसवीं व बारहवीं कक्षा में एक भी छात्र पास नहीं हुआ है। यही नहीं जिले में 34 स्कूल ऐसे भी हैं, जिनका परीक्षा परिणाम पांच फीसदी से कम रहा है। शिक्षा निदेशालय ने पांच फीसदी से कम परीक्षा परिणाम वाले स्कूलों के मुखिया को 19 जनवरी को पंचकूला तलब कर लिया है।
निदेशालय का फरमान जारी होने के बाद अब जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों व अध्यापकों में खलबली मच गई है। इस पर जिला शिक्षा अधिकारी ने भी पांच फीसदी से कम परीक्षा परिणाम वाले स्कूलों के मुखिया को खराब परिणाम पर स्पष्टीकरण मांग लिया है।
प्रदेश में लगातार गिरते शिक्षा स्तर में सुधार को लेकर शिक्षा विभाग व सरकार द्वारा अब तक किए गए तमाम प्रयास अधूरे साबित हुए हैं। इसका असर प्रदेश की स्कूली शिक्षा पर पड़ा है। प्रदेश में सितंबर में हुई दसवीं व बारहवीं के प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाओं का परिणाम दिसंबर में घोषित हुआ है। हालांकि, प्रदेशभर में दसवीं कक्षा का परिणाम 30 प्रतिशत का आंकड़ा नहीं छू पाया है।
अध्यापकों की गुटबाजी व राजनीति से हो रही शिक्षा प्रभावित
प्रदेश में लगातार गिरते शिक्षा परिणाम कारण स्कूलों में अध्यापकों की गुटबाजी व राजनीति भी है। गत माह दो स्कूलों के मुखिया का आत्महत्या करने पर मजबूर होना भी इस बात का सबूत है, लेकिन शिक्षा विभाग व सरकार इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। हालांकि, स्कूलों में खाली पड़े अध्यापकों के पद व सेमेस्टर सिस्टम से भी प्रदेश के शिक्षा स्तर में गिरावट आयी है।
जिन स्कूलों का परीक्षा परिणाम पांच फीसदी से कम आया है, विभाग द्वारा उन स्कूलों के मुखिया से स्पष्टीकरण मांगा गया है। ऐसे सभी स्कूलों की लिस्ट शिक्षा निदेशालय पंचकूला भेज दी है। इसके अलावा, खराब रिजल्ट वाले स्कूल मुखिया को पंचकूला में 19 जनवरी को तलब किया गया है।
-आशा मुंजाल, जिला शिक्षा अधिकारी, करनाल