हरियाणा शिक्षा विभाग ने मिड डे मील की गुणवत्ता परखने के लिए एक नई कवायद शुरू की है, ताकि बच्चों को अच्छा खाना मिले। हरियाणा के सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिड-डे मील परोसने से पहले इसकी गुणवत्ता की जांच में स्टूडेंट्स की माताओं को भी शामिल किया जाएगा।
हरियाणा की मौलिक शिक्षा विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश सरकार ने स्कूली बच्चों को गुणवत्तायुक्त मिड-डे-मील उपलब्ध करवाने की दिशा में यह पहल की है। प्रवक्ता के मुताबिक भारतीय खाद्य निगम के डिपुओं से मिड-डे मील से संबंधित खाद्यान्न के उठान से पहले उसकी गुणवत्ता तथा वजन की जांच की जानी चाहिए।
मिड-डे मील के लिए बाजार से खुला तेल या घी खरीदने की बजाय अच्छी कंपनी के सील-बंद तेल, घी, दालों या मसालों का ही प्रयोग किया जाए। वृक्ष के नीचे या खुले में खाना तैयार करने की बजाय किचन में ही इसे तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्कूल के मुखिया या मिड-डे मील के इंचार्ज की देखरेख में बनने वाले भोजन को परोसने से पहले कोई अध्यापक अवश्य चखकर देखें। सरकारी स्कूलों में बनने वाले मिड-डे मील का माह में कम से कम एक बार मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में टेस्ट भी जरूरी होगा। हर तीन महीने के अंतराल पर सांसद व जिला उपायुक्त की अध्यक्षता में मिड-डे मील के संबंध में बैठक ली जाएगी।
किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी स्कूलों में स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल, उपायुक्त, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी व खंड शिक्षा अधिकारी का टेलीफोन नंबर एक बोर्ड पर लिखा होना चाहिए। जिन जिलों में इस्कॉन द्वारा मिड-डे मील दिया जा रहा है, वहां के जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी भोजन की उचित जांच करेंगे।