आने वाले वक्त में हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के स्कूल के किताबों में बदलाव देखने को मिल सकती है। शिक्षा विभाग एक से लेकर पांचवीं कक्षा तक के किताबों में बदलाव करने की योजना पर काम करना शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि किताबों में फेरबदल के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (एससीईआरटी) की टीम ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् में वर्कशॉप कर प्रशिक्षण भी लिया है।
दरअसल, मौजूदा किताबों में टेक्स्ट के अलावा चित्रों या कार्टून की बहुत कम जगह है। प्राइमरी कक्षा के छात्रों को पढ़ने में कम मन लगता है। इसे देखते हुए पाठ्यपुस्तक की समीक्षा शुरू की गई है। इसके लिए सरकारी स्कूल के शिक्षकों के साथ निजी स्कूल के शिक्षकों से राय ली जाएगी। शिक्षकों से वर्तमान किताबों के बारे में फीडबैक लेगी ताकि जरूरत के अनुसार पाठ्यक्रम को तैयार किया जा सके।
विभाग का दावा है कि तैयार होने वाली नई किताब एनसीईआरटी (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद्) की किताब से अच्छी होगी। साथ ही किताबों को रोचक बनाने के लिए कार्टून, फोटो, ग्राफ का इस्तेमाल किया जाएगा। विषय को कहानी के रूप में पात्र सृजन कर अध्याय तैयार किया जाएगा।
साल 2011 में किया गया था बदलाव
नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क के अनुसार शिक्षा विभाग ने 2011 में कक्षा एक से पांचवीं के पाठ्यक्रम में बदलाव किया था। इसके तहत किताबों से बच्चों के रटने के बजाय समझने पर जोर दिया गया था। इसका उद्देश्य बच्चों को व्यवाहरिक शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ बौद्धिकता बढ़ाना था।
स्नेहलता, निदेशक, एससीईआरटीं एनसीईआरटी की वर्कशॉप की रिपोर्ट एक सितंबर तक आगी। रिपोर्ट के आधार पर किताबों की समीक्षा की शुरुआत की जाएगी। पहली से पांचवीं तक की कक्षा के किताबों को और रूचिकर बनाया जाएगा।