जिन अभिभावकों के बच्चे सीबीएसई स्कूलों में पढ़ रहे हैं, उनके लिए अच्छी खबर है। अब उन्हें बच्चों की फीस, शिक्षकों और अन्य सुविधाओं के बारे में जानने के लिए स्कूलों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है।
सीबीएसई ने सभी स्कूल संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वे अपनी रिवाइज फीस, फैकल्टी तथा स्कूल से संबंधित पूरी जानकारी वेबसाइट पर अपलोड करें। सीबीएसई के अधिकारियों का कहना है कि जो स्कूल फीस बढ़ाने के उपरांत विभाग के आदेशों की पालना नहीं करेगा, उसकी मान्यता भी रद्द की जा सकती है।
एक क्लिक पर मिलेगी जानकारी
सीबीएसई स्कूलों में नया सत्र शुरू होने के उपरांत इन दिनों दाखिले की प्रक्रिया जारी है। नए सत्र में ट्विन सिटी के अलावा जिले के अधिकांश स्कूलों ने 10 से 15 प्रतिशत तक फीस में इजाफा किया है, लेकिन इसकी जानकारी बहुत कम अभिभावकों को है। यही वजह है कि उन्हें बच्चों की फीस तथा अन्य जानकारी के लिए इन दिनों स्कूलों के चक्कर काटते देखा जा सकता है।
अब अभिभावकों को ऐसा करने की जरूरत नहीं है। बस एक क्लिक पर घर बैठे, वे अपने बच्चों की फीस, फैकल्टी, बुक्स की लिस्ट, टीचर्स की एजुकेशन का ब्योरा, तथा स्कूल के अन्य स्ट्रैक्चर की जानकारी ले सकते हैं।
वेबसाइट पर अपलोड करें जानकारी
हाल ही में सीबीएसई ने सभी स्कूल संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वे उपरोक्त सभी जानकारी अपनी वेबसाइट पर अपलोड करें। इसके अलावा यह भी बताएं कि स्कूल किस मद में कितना शुल्क ले रहा हैं।
यह जानकारी भी वेबसाइट पर अपलोड करनी अनिवार्य है। ताकि फीस को लेकर अभिभावकों में किसी प्रकार का असमंजस न रहे। सीबीएसई अधिकारियों का कहना है कि स्कूलों को ग्रेड के मुताबिक ही फीस बढ़ाने का अधिकार है, लेकिन अभी तक उन्हें ग्रेड नहीं मिला है, इसलिए वे फिलहाल मनमर्जी से फीस में इजाफा कर रहे हैं।
तो होगी मान्यता रद्द
सीबीएसई के अधिकारियों का कहना है कि किन कक्षाओं में कौन की किताबें पढ़ाई जा रही है, फीस बढ़ाने की जानकारी स्कूलों ने अपडेट किया या नहीं, शिक्षकों की एजुकेशन तथा विद्यार्थियों संबंधी जरूरी जानकारी पर उनकी नजर रहेगी।
सीबीएसई के अधिकारियों का कहना है कि विभाग की गाइडलाइन के मुताबिक स्कूल संचालक 10 से 15 प्रतिशत तक ही फीस में बढ़ोतरी कर सकते हैं। लेकिन उन्हें इसकी पूरी जानकारी स्कूल वेबसाइट पर डालना अनिवार्य है।
जो स्कूल संचालक फीस में बढ़ोतरी करने के उपरांत सीबीएसई के आदेशों की पालना नहीं करेगा, उसकी मान्यता को रद्द किया जा सकता है। वहीं अभिभावकोें ने सीबीएसई की इस पहल की सराहना की है। अभिभावकों का कहना है कि पारदर्शिता के लिहाज से सीबीएसई ने बड़ा कदम उठाया है।
तीन साल में एक्रीडिएशन सर्टिफिकेट लेना जरूरी
सीबीएसई के अधिकारियों का कहना है कि एक्रीडिएशन प्रक्रिया के तहत स्कूलों को उनकी परफॉर्मेंस के आधार पर ग्रेड प्रदान किए जाएंगे। आने वाले तीन सालों के भीतर सभी सीबीएसई स्कूलों को एक्रीडिएशन सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है। जो स्कूल यह सर्टिफिकेट लेंगे, सीबीएसई द्वारा नियमित रूप से उनकी मोनिटरिंग भी की जाएगी।
इसका सबसे बड़ा फायदा शिक्षा में गुणवत्ता बनाए रखना तथा उसमें सुधार करना रहेगा। इसके अलावा विद्यार्थियों व शिक्षकों की स्थिति, शिक्षकों की एजुकेशन का ब्यौरा तथा उनके वेतन संबंधी जानकारी से भी सीबीएसई व अभिभावक अपडेट रहेगे। सीबीएसई अधिकारियों का कहना है कि स्कूल की दो साल की परफॉर्मेंस के आधार पर ग्रेड प्रदान किया जाएगा।
ये कहते हैं अधिकारी
स्कूलों में फीस व फैकल्टी से संबंधित पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सीबीएसई ने यह निर्णय लिया है। सभी स्कूल संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वे विद्यार्थियों की फीस, टीचर्स तथा स्कूल संबंधी अन्य जानकारी अपनी स्कूल वेबसाइट पर अपलोड करें। जो स्कूल संचालक फीस बढ़ाने के बाद निर्देशों की पालना नहीं करेगा, उसकी मान्यता भी रद्द की जा सकती है।
- आरजे खांडेराव, क्षेत्रीय अधिकारी, सीबीएसई, पंचकूला जोन।