विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को अब साइंस के ऑनलाइन जर्नल मुफ्त में पढ़ने को मिलेंगे।
अभी तक जर्नल महंगे होने के कारण स्टूडेंट्स इन्हें पढ़ नहीं पाते थे।
कई बार टीचर्स भी इंटरनेशनल साइंस जर्नल एक्सेस नहीं कर पाते थे लेकिन अब भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से की जा रही पहल के कारण अब मुफ्त जर्नल पढ़ने की सुविधा मिलेगी।
इससे क्वॉलिटी रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा। बेसिक साइंस के क्षेत्र में अच्छे रिसर्च होने से देश को भी काफी फायदा होगा।
रिसर्च एंड डवलपमेंट के मजबूत होने से देश भी मजबूत होगा। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से तैयार मसौदे के अनुसार अब साइंस के सभी जर्नल ऑनलाइन होंगे।
इसे स्टूडेंट्स फ्री एक्सेस कर सकेंगे। डिपार्टमेंट ऑफ बॉयोटेक्नोलॉजी व डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने ओपन एक्सेस पॉलिसी तैयार की है।
इसके माध्यम से इंस्टीट्यूशंस को ऑनलाइन साइंस जर्नल एक्सेस करने को मिलेंगे। अभी कई इंटरनेशनल साइंस जर्नल ऐसे हैं, जिन्हें पढ़ने के लिए स्टूडेंट्स व रिसर्च करने वाले साइंटिस्ट और टीचर्स को धन खर्च करना पड़ता है।
अच्छे साइंस जर्नल पढ़ने से स्टूडेंट्स, टीचर्स को बेहतर ढंग से रिसर्च करने में मदद मिलेगी। ऐसी कार्ययोजना तैयार की जा रही है, जिससे साइंस जर्नल का ओपन एक्सेस बेहतर ढंग से हो सके।
अभी साइंस में इंटरनेशनल लेवल के जर्नल, जिसमें नेचर, करेंट साइंस, केमिकल रिव्यू, साइंस, अमेरिकन केमिकल सोसाइटी (एसीएस) जैसे जर्नल ऐसे हैं, जिन्हें पढ़ने के लिए भुगतान करना पड़ता है।
यह नामी साइंस जर्नल ऐसे हैं, जिसमें साइंस के क्षेत्र में हो रहे नए-नए प्रयोगों के बारे में जानकारी दी जाती है।
क्रिश्चियन पीजी कॉलेज में भौतिक विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मौलींदु मिश्रा इस बारे में कहते हैं कि सरकार की ओपन एक्सेस पॉलिसी से रिसर्च स्कॉलर्स को काफी फायदा होगा। बेसिक साइंस के क्षेत्र में रिसर्च की बहुत जरूरत है।
जब ख्याति प्राप्त साइंस जर्नल पढ़ने को मिलेंगे, तो जाहिर सी बात है कि प्रयोग के लिए दिमाग भी ज्यादा खुलेगा। ऐसे में इस पॉलिसी से स्टूडेंटस को फायदा होगा।