डीएवी कॉलेज में छात्रों के आई कार्ड पर मुहर लगवाने के दौरान दो छात्र नेत्रियों में भिड़ंत हो गई। दोनों ने जमकर मारपीट की। बीच-बचाव करने पहुंचे छात्र भी उनके आगे बेबस नजर आए।
विज्ञापन
हाथापाई, छीनाझपटी में एक छात्रा के हाथ का नाखून उखड़ गया। पुलिस ने दोनों को चौकी में बिठाया, जहां कुछ देर बाद ही उनमें समझौता हो गया। डीएवी कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव के लिए 11 को मतदान होना है। आई कार्ड पर चीफ प्रॉक्टर के साइन न होने पर छात्र वोट से वंचित रह जाएंगे।
यह नियम देखते हुए इन दिनों छात्रनेता सैकड़ों आई कार्ड लेकर साइन करवाने के लिए सुबह ही जुट जाते हैं। सोमवार को भी विकास ग्रुप की एक छात्रा नेता और एक अन्य छात्रा नेता आई कार्ड पर साइन करवाने के लिए प्रॉक्टर ऑफिस के बाहर खड़ी थीं।
विज्ञापन
हंगामा होता देख पहुंची पुलिस
इस बीच किसी बात पर दोनों में बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते दोनों एक दूसरे पर लात-घूंसे बरसाने लगीं। बाल पकड़कर खींचतान हुई। कुछ छात्र बीच बचाव करने आए लेकिन दोनों नहीं मानीं। हंगामा होता देख पुलिस पहुंची।
दोनों छात्राओं को पकड़कर करनपुर चौकी ले गई। मुकदमा दर्ज होने के डर से दोनों चौकी में फूट-फूटकर रोने लगी। बाद में दोनों के बीच समझौता हो गया।
गत वर्ष भी भिड़ी थीं छात्राएं पिछले साल भी डीएवी कॉलेज में अध्यक्ष पद की प्रत्याशी एक छात्र नेत्री के समर्थकों और दूसरे गुट की छात्राओं के बीच जबरदस्त झगड़ा हुआ था। उस वक्त कुछ लड़कों ने अपशब्दों से भरपूर इस झगड़े की वीडियो बना ली थी।
इसके अलावा एमकेपी पीजी कॉलेज में भी दो छात्र नेत्रियों के बीच मारपीट हुई थी। दोनों ने एक दूसरे के बाल खींच डाले थे।
यूटीयू पर बरसी छात्राएं, हंगामा
यूटीयू के संघटक कॉलेज डब्लूआईटी की छात्राएं विवि पर बरस पड़ीं। 800 छात्राओं का हुजूम विवि पहुंचा और कुलपति, कुलसचिव समेत सभी अधिकारियों को बाहर निकाल कार्यालयों में ताले जड़ दिए। मुख्य गेट भी बंद कर दिया गया।
दिनभर हंगामा चलता रहा। घंटों बाद मेन गेट के ताले खुलने के बाद अधिकारी घर लौट सके। यूटीयू के संघटक कालेजों पिथौरागढ़ के एसआईटी और गोपेश्वर के आईटी कॉलेज का राजकीयकरण किया जा चुका है। डब्लूआईटी की छात्राएं भी राजकीयकरण और एआईसीटीई से मान्यता लिए जाने की मांग कर रही हैं।
सोमवार को कॉलेज की छात्राएं विवि परिसर पहुंची और प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि विवि की लापरवाही से राजकीयकरण नहीं हो रहा है। छात्राओं का रुख देख कुलपति प्रो. वीके जैन, कुलसचिव अवनीश जैन, उप कुलसचिव डॉ. आशीष उनियाल, अवधेश कुमार, परीक्षा नियंत्रक आरके सिंह, डब्ल्यूआईटी के निदेशक एसके गोयल सहित सभी अधिकारी सकते में आ गए।
उन्होंने छात्राओं को समझाने का प्रयास किया लेकिन वह नहीं मानी। कुलपति ने वार्ता के लिए भी बुलाया लेकिन वह सुनने को तैयार नहीं थी। गुस्साई छात्राओं ने विवि में प्रवेश का मुख्य गेट भी बंद कर दिया। इस वजह से साढ़े तीन बजे तक कोई भी व्यक्ति विवि परिसर से बाहर नहीं जा पाया। इसके बाद छात्राओं ने ताला खोला।
बाद में छात्राओं का प्रतिनिधिमंडल सीएम हरीश रावत से मिलने पहुंचा, जबकि बाकी विवि में धरने पर बैठ गईं। सीएम के दिल्ली में होने के कारण छात्राएं ज्ञापन देकर लौट आईं। छात्राओं को बुधवार को मुलाकात के लिए बुलाया गया है।
बता दें कि यूटीयू के संघटक कॉलेज के तौर पर वर्ष 2011 में सरकार ने डब्ल्यूआईटी कॉलेज की स्थापना की थी। इसमें बीटेक की पांच ट्रेड में इस वक्त 800 छात्राएं अध्ययनरत हैं।
यह होगा फायदा कॉलेज का राजकीयकरण होने से छात्राओं को आर्थिक लाभ होगा। यूटीयू के संघटक कॉलेजों का खर्च उसमें पढ़ने वाले छात्रों के शुल्क से ही निकलता है, जबकि सरकारी कॉलेज में पूरा खर्च सरकार देती है। एसआईटी और आईटी कालेज का राजकीयकरण होने के बाद वहां सालाना शुल्क 50 हजार से घटकर 25 हजार हो जाएगा।
छात्राओं की मांग को हम पूरी मजबूती के साथ शासन के पास भेजेंगे। कालेज के राजकीयकरण का अधिकार शासन को ही है। - प्रो. वीके जैन, कुलपति, यूटीयू