उत्तर प्रदेश टेक्निकल यूनिवर्सिटी (यूपीटीयू) ने बृहस्पतिवार को सेक्टर-63 स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एंटरप्रिन्योरशिप (एनआईई) पर छापा मारकर कॉलेज में चल रहे फर्जीवाड़े को पकड़ा।
यहां एमबीए के करीब 25 छात्रों को एडमिशन देकर मुजफ्फरनगर के श्रीराम ग्रुप ऑफ कॉलेज (एसआरजीसी) के नाम पर पंजीकृत कराया गया था। विश्वविद्यालय ने कॉलेज के खिलाफ एफआईआर करने की तैयारी कर ली है।
दरअसल, यह संस्थान छात्रों को यूपीटीयू के नाम पर दाखिला दे रहा था। इसमें छात्रों को मुजफ्फरनगर के कॉलेज में पंजीकृत कराते हुए पहले साल के दोनों सेमेस्टर की परीक्षाएं करा ली गई थीं। कक्षाएं सेक्टर-63 के कैंपस में चलती थीं। साथ ही छात्रों को पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम इन मैनेजमेंट (पीजीपीएम) भी कराया जा रहा था।
पूरे कोर्स की 3.50 लाख रुपये फीस वसूली जा रही है। विवि के अपर परीक्षा नियंत्रक डॉ. विक्रम सिंह ने अपने कर्मचारियों के साथ सिटी मजिस्ट्रेट कांता प्रसाद और उनकी टीम के सहयोग से छापा मारा। कॉलेज के सारे दस्तावेज जब्त कर लिए गए। छात्रों व फैकल्टी के बयान दर्ज किए गए।
कैंपस से भरतियार यूनिवर्सिटी तमिलनाडु के भी कागजात मिले हैं। विश्वविद्यालय ने संस्थान की निदेशक नीता खन्ना से पूछताछ कर लिखित जानकारी ली। विश्वविद्यालय अब इसके खिलाफ एफआईआर की तैयारी में है। यूपीटीयू प्रशासन का कहना है कि इस मामले में एसआरजीसी (यूपीटीयू से संबद्ध है) संलिप्त पाया गया तो उसकी मान्यता रद्द करने की सिफारिश की जाएगी।
मुजफ्फरनगर में ही हुई परीक्षाएं
इस कार्रवाई के दौरान संस्थान में मौजूद छात्रों ने बताया कि उनका परीक्षा केंद्र मुजफ्फरनगर के एक कॉलेज में बना था, जहां परीक्षाएं देने के लिए उनके ठहरने का इंतजाम हॉस्टल में होता था। छात्रों का कहना है कि दोनों सेमेस्टर की परीक्षाएं हुईं, यूपीटीयू की वेबवाइट पर रिजल्ट आया, जिसके चलते उन्हें इसमें कुछ भी फर्जी नहीं लगा।