फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Exclusive: एमकेपी में लाखों का खेल

Fri, 02 May 2014 12:11 PM IST
आफताब अजमत/अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
महादेवी कन्या पाठशाला पीजी कॉलेज यानी एमकेपी में भारी वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। कॉलेज में यूजीसी से मिली ग्रांट को मनमाने ढंग से खर्च किया गया। सचिव वित्त भास्करानंद ने इस बाबत प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा को एक पत्र भेजा है।
विज्ञापन


सरकारी धन का मनमर्जी उपयोग
एमकेपी कॉलेज में बीते दिनों दो ऑडिट हुए। एक ऑडिट निदेशालय के अधीन जिला लेखा परीक्षा अधिकारी ने किया तो दूसरा ऑडिटर जनरल(एजी) ने किया। दोनों में ही भारी वित्तीय अनियमितताएं और सरकारी धन को मनमर्जी से उपयोग करने की बातें सामने आई हैं।

तत्कालीन कार्यवाहक प्राचार्य डा. किरन सूद और अवैतनिक सचिव जितेंद्र सिंह नेगी ने यूजीसी से आए 45 लाख रुपये के ड्राफ्ट को निर्धारित खाता संख्या 3882 में जमा करने के बजाए अलग से खाता संख्या 12868 में जमा कर दिया।
विज्ञापन


वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बाद आठ व नौ अप्रैल 2013 को दो दिनों के भीतर नौ चेकों से इसमें से 43.68 लाख की धनराशि निकाल ली गई। खर्च करने के बाद यूजीसी को यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट भी नहीं भेजा गया।

दूसरी ओर, ऑडिटर जनरल की जांच में पाया गया कि यूजीसी से मिली ग्रांट से बिना टेंडर ही खरीदारी कर ली गई। एजी ने फरवरी 2014 में जांच में पाया गया कि कॉलेज की रोकड़ बही दिसंबर 2012 से जुलाई 2013 और दिसंबर 2013 से जनवरी 2014 की रोकड़ बही में आय और व्यय की प्रविष्ठी नहीं की गई जिसकी वजह से 6,69,106 रुपये खर्च का रिकॉर्ड नहीं मिल पाया।

यह भी उठे सवाल
- तत्कालीन कार्यवाहक प्राचार्य डा. किरन सूद की ओर से इतिहास विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डा. अर्चना शुक्ला को 1.02 लाख रुपये का अनियमित भुगतान किया गया।
- प्रबंध समिति ने नवंबर 2012 से 2013 तक के लिए कॉलेज में रखे गए अस्थाई प्रवक्ताओं और रिसर्च स्कॉलर को 3.29 लाख रुपये का वेतन भुगतान नहीं किया जबकि नॉन मेंटिनेंस मद में 57.67 लाख रुपये मौजूद थे।
- तत्कालीन कार्यवाहक प्राचार्य डा. किरन सूद के कार्यकाल एक दिसंबर 2012 से ऑडिट की तिथि तक कैशबुक, लेजर, अनुदान पंजिका, बैंक खाते व अन्य अभिलेख तैयार नहीं किए गए।
- ऑडिट में यह बात भी सामने आई है कि प्रबंध समिति ने एचएनबी गढ़वाल विवि प्रथम परिनियमावली मार्च 1993 के नियमों का उल्लंघन किया है। समिति ने एमकेपी कॉलेज के हॉस्टल खाते से 19 अक्तूबर 2006 को प्रस्ताव पारित कर 15 लाख रुपये ऋण सोसाइटी के महादेवी इंस्टीट्यूट में खर्च कर दिया।
- प्रबंधन समिति ने शासनादेश और एमकेपी कॉलेज की वित्त उप समिति में पारित प्रस्ताव के तहत सेल्फ फाइनेंस कोर्स से होने वाली आय का 40 प्रतिशत हिस्सा महाविद्यालय को नहीं दिया, जो कि अनियमितता है।
- ऑडिट में कहा गया है कि प्रबंध समिति ने शासनादेश और निदेशक उच्च शिक्षा के आदेशों के विपरीत छात्रावास के वित्तीय कार्यों का संचालन एकल हस्ताक्षर प्रणाली से किया है जो कि वित्तीय अनियमितता है।
- मई और जून 2013 में शिक्षिकाओं और कर्मचारियों का वेतन न दिए जाने की वजह से संस्थान को शैक्षणिक और आर्थिक हानि हुई।
- सोसाइटी प्रबंध, संस्थापक परिवार, सोसाइटी सदस्यों, प्राचार्य, शिक्षिकाओं और कर्मचारियों के आपसी विवादों में ही वर्ष 2010-11 से 12 अक्तूबर 2013 तक 5.12 लाख रुपये अधिवक्ताओं पर खर्च कर दिया गया।
- सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम 1960 के तहत आने वाले सोसाइटी के सभी संस्थानों का शत प्रतिशत ऑडिट होना चाहिए।
- हाईकोर्ट के आदेशानुसार प्राचार्य डा. इंदु सिंह को पूर्ण वेतन भुगतान में तत्काल कार्रवाई के बजाए दो माह की देरी प्रबंधन की हठधर्मिता को दर्शाती है।

प्रबंध समिति ने रिसर्च स्कॉलर को भुगतान का प्रस्ताव पारित कर दिया था लेकिन कॉलेज ने भुगतान नहीं किया। जांच हो तो सबकी हो और कार्रवाई हो, हमें कोई आपत्ति नहीं है।
विज्ञापन

जितेंद्र नेगी, अवैतनिक सचिव, एमकेपी प्रबंध सोसाइटी

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें