बाबा साहब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में 12 विभागों में 42 शिक्षकों की भर्ती में जमकर फर्जीवाड़ा किया गया।
इसमें वर्ष 2010 में तत्कालीन कुलपति प्रो. बी. हनुमैय्या ने एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर पद पर जिन शिक्षकों को भर्ती किया, वह इन पदों के लिए योग्य ही नहीं थे।
बल्कि उन्होंने तमाम योग्य शिक्षकों को इंटरव्यू में नजरअंदाज कर दिया।
यही नहीं, इसमें से कई योग्य शिक्षकों को बुलाया ही नहीं। तत्कालीन कुलपति ने अपने चहेतों को भर्ती करने के चक्कर में यह खेल किया।
बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट (बाम) के निर्देश पर एक्सपर्ट्स से जब इन सभी शिक्षकों के एकेडमिक परफॉर्मेंश इंडिकेर्ट्स (एपीआई) की जांच की गई तो यह मामला सामने आया।
अब आगे बाम इस मसले पर अंतिम निर्णय लेगी। एपीआई की यह स्क्रीनिंग बाम के निर्देश पर ही की गई है और इसमें विषय विशेषज्ञों को बुलाया गया। इससे पहले पूर्व कुलपति ने जो स्क्रीनिंग करवाई थी।
उसमें भी उन्होंने खेल कर दिया था। वर्ष 2010 में जिन विभागों में एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर पद पर शिक्षकों की भर्ती हुई थी।
उनमें इकोनॉमिक्स, हिस्ट्री, राजनीति विज्ञान, ह्यूमन राइट्स, रूरल मैनेजमेंट, एप्लाइड केमेस्ट्री, लाइब्रेरी एंड इनफॉरर्मेशन साइंस, एनवॉयरमेंटल माइक्रोबॉयोलॉजी, फॉर्मास्टिुकल साइंस, एप्लाइड फिजिक्स, मैथमेटिक्स एंड स्टेटिक्स और बॉयोटेक्नोलॉजी विभाग है।
इस फर्जीवाड़े का मुद्दा करीब डेढ़ वर्ष पूर्व ही उठ गया था, मगर जांच के नाम पर अभी तक इसे लटकाया जा रहा था। अब बाम की सख्ती के बाद जांच में तेजी आई तो गड़बड़ियां सामने आ रही हैं।
जिन शिक्षकों को एपीआई में रिजेक्ट किया गया है, उन्हें अपने पद से हाथ धोना पड़ेगा। काफी संख्या में शिक्षकों की नौकरी जाएगी।
इस प्रकरण में गड़बड़ी भांपकर पहले ही कुछ शिक्षक यहां से जा चुके हैं। इस पूरे प्रकरण पर बीबीएयू के प्रवक्ता प्रो. गोविंद जी पांडेय ने कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया।
उन्होंने कहा कि सबकुछ बाम के निर्देश पर हो रहा है और इससे विवि प्रशासन का कोई लेना-देना नहीं है। आगे बाम का जो आदेश होगा हम उसका पालन करेंगे।