पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) की नवगठित सिंडीकेट की 4 जनवरी, 2014 को होने वाली पहली बैठक हंगामेदार हो सकती है।
नवगठित सिंडीकेट में किसी गुट का बहुमत न होने के कारण यह बैठक दोनों ही गुटों के लिए अहम है। बैठक में ऐसे अहम मुद्दे आ रहे हैं जो पहले या तो सिंडीकेट में वापस हो चुके हैं या उन्हें सिंडीकेट ने मंजूरी नहीं दी थी।
सीनेट ने इन मुद्दों को दोबारा से विचार के लिए सिंडीकेट को रैफर किया था। बैठक में एक गुट इन मुद्दों का विरोध करेगा तो दूसरा गुट इन मुद्दों को पारित कराने के लिए जोर लगाएगा।
बैठक से यह स्पष्ट हो जाएगा कि सिंडीकेट में कौन सा गुट हावी रहेगा। बैठक में 90 से ज्यादा मुद्दों पर विचार होगा और बैठक का एजेंडा एक-दो दिन में जारी होगा।
बैठक में वीसी प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर की पत्नी प्रो. नीरा ग्रोवर को संगीत विभाग में प्रोफेसर के रिक्त पद पर एक साल की एक्सटेंशन देने का मुद्दा विचार के लिए आएगा।
सिंडीकेट की 8 अक्तूबर को हुई बैठक में प्रो. नीरा ग्रोवर को एक्सटेंशन देने की मंजूरी नहीं दी थी।
सीनेट की 8 दिसंबर को हुई बैठक में इस मुद्दे पर हंगामा हुआ था और इसे सर्वसम्मति से सिंडीकेट को दोबारा से विचार के लिए रैफर कर दिया था।
प्रो. नीरा ग्रोवर अपना एक साल का टर्म खत्म होने के बाद मुंबई में एसएनडीटी यूनिवर्सिटी में वापस ज्वाइन कर चुकी हैं।
प्रोफेसरों की नियुक्ति का मामला उठेगा
सिंडीकेट बैठक में लोक प्रशासन विभाग और यूसोल में हुई चार सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति के मामले पर भी हंगामा होगा।
सिंडीकेट ने इन नियुक्तियों को भी मंजूरी नहीं दी थी और सीनेट में हंगामे के बाद इसे सिंडीकेट को रैफर किया गया था।
इसके अलावा यूआईपीएस में सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति का मामला भी सीनेट से रैफर किया गया है।
वोटिंग हुई तो चतरथ गुट रहेगा हावी
नवगठित सिंडीकेट में गोयल गुट के सात उम्मीदवार हैं और चतरथ-भाजपा-डीएवी गुट के आठ उम्मीदवार हैं।
दो उम्मीदवार पदेन हैं और एक वोट कुलपति का है। ऐसे में अगर किसी मुद्दे पर वोटिंग कराने की नौबत भी आती है तो सिंडीकेट में गोयल गुट कमजोर पड़ सकता है।