देश की नंबर वन यूनिवर्सिटी का खिताब पाने वाली पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) विद्यार्थियों को एग्जामिनेशन सिस्टम में ढेरो हाइटेक सुविधाएं देने का दावा करती है।
लेकिन, स्टार यूनिवर्सिटी के अधिकारी ढाई महीने के बाद भी विद्यार्थियों की मांग पर बीए स्तर के दो लैंग्वेज विषयों (अंग्रेजी और हिंदी) के एडिशनल पेपर लेना पर फैसला नहीं कर पा रहा है।
पीयू अधिकारियों की ओर से मामले को लेकर दिसंबर में ही कुछ डीन को मिलाकर कमेटी बना दी गई। पहले मामले को मंजूरी के लिए 19 फरवरी तिथि तय की गई, बाद में इसे फिर 11 मार्च तय कर दिया है।
पीयू की वार्षिक परीक्षाएं अप्रैल से शुरू होने जा रही हैं। लेकिन, पीयू प्रशासन के सुस्त रवैये से इन परीक्षाओं में बैठने के इच्छुक विद्यार्थियों को कोई राह सुझ नहीं रही।
अधिकारियों का कहना है कि अगर कमेटी ने परीक्षा लेने की इजाजत दे दी तो विद्यार्थियों को आवेदन करने का मौका दिया जा सकेगा। कमेटी अगर 11 मार्च को फैसला विद्यार्थियों के हक में ले भी लेती है तो फिर इसे सिंडीकेट और सीनेट में भी लाना होगा। ऐसे में परीक्षा में बैठने की आस में विद्यार्थियों के अरमानों पर पानी फिर जाएगा।
अमर उजाला ने इस मामले को सबसे पहले 18 दिसंबर के अंक में सिर्फ पंजाबी लैंग्वेज वालों को एडीशनल पेपर देने की अनुमति... शीर्षक से खबर प्रकाशित कर विद्यार्थियों की मांग को पीयू प्रशासन तक पहुंचाया था।
उधर, इस मामले में पीयू स्टूडेंट काउंसिल प्रेसिडेंट चंदन राणा ने कहा कि पीयू को विद्यार्थियों के हितों को देखते हुए तुरंत मीटिंग कर अंग्रेजी और हिंदी के एडीशनल पेपर देने की अनुमति देनी चाहिए। इस मामले में वह मंगलवार को ही अधिकारियों से मिलेंगे।
दूसरी यूनिवर्सिटी से बीए करने वाले विद्यार्थियों को इलेक्टिव अंग्रेजी और हिंदी की अनुमति मामले में डीन की कमेटी गठित की हुई है। मैंने संबंधित विभाग को 11 मार्च से पहले बैठक करने को कहा है। कमेटी से अप्रुवल मिलने पर विद्यार्थियों को आवेदन करने के लिए समय दिया जाएगा।
प्रो.एके भंडारी (रजिस्ट्रार पीयू )
सीओई ब्रांच को दो लैंग्वेज विषय के एडीशनल पेपर लेने में कोई आपत्ति नहीं है। काउंसिल प्रधान और स्टूडेंट के मांग पत्र को नियमों के तहत संबंधित कमेटी के पास तुरंत भेज दिया गया था। कमेटी को ही मामले में अंतिम फैसला लेना है।
प्रो.परविंदर सिंह (कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन पीयू)