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कब होगा इवनिंग क्लास का 'उजियारा'?

Thu, 06 Nov 2014 10:33 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में इवनिंग क्लास में पढ़ने के ख्वाहिशमंद छात्र पूछते फिर रहे हैं कि कहां हैं इवनिंग क्लासेज? हाईकोर्ट के आदेश के बाद कॉलेजों में पैदा हुए दाखिला संकट को खत्म करने के लिए सरकार ने ईवनिंग क्लासेज की घोषणा तो कर दी।
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लेकिन उसे जमीन पर नहीं उतार पाई। जिन महाविद्यालयों में सांध्यकालीन कक्षाओं की ज्यादा जरूरत थी, वहां अब तक कोई काम नहीं हुआ है। आलम यह है कि सात करोड़ रुपये के बजट की घोषणा सरकार ने की थी लेकिन अभी तक किसी भी कालेज को एक पाई तक नहीं मिली है।

जहां जरूरत है वहां कुछ भी नहीं
हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद डीएवी, डीबीएस, एमकेपी और एसजीआरआर कॉलेज में सबसे ज्यादा दाखिला संकट पैदा हुआ था। जहां हर साल दाखिलों की संख्या 10 हजार पार कर जाती थी, वहां मेरिट पर निर्धारित सीटों पर दाखिला होने के बाद पांच हजार से ज्यादा छात्र दाखिले से वंचित रह गए।
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डीएवी कॉलेज में सांध्य कालीन कक्षाओं के लिए सीटों की संख्या 980 दी गई, लेकिन यहां अभी तक एक भी दाखिला नहीं हो पाया है। पांच हजार से ज्यादा छात्र यहां दाखिले के इंतजार में हैं। डीबीएस कॉलेज में इवनिंग क्लासेज में दाखिले तो हो गए।

लेकिन अब तक शिक्षक नहीं होने से छात्र पढ़ने के लिए भटक रहे हैं। एसजीआरआर पीजी कॉलेज को सीटों की संख्या पता है, लेकिन इससे आगे प्रवेश कब होंगे, कैसे होंगे, इसका कुछ पता नहीं है।

सरकारी औपचारिकता
हर साल प्रदेश में सरकारी डिग्री कॉलेजों में सीटें खाली रहती थी। विकासनगर, डोईवाला सहित कुछ कॉलेजों को छोड़ दें तो बाकी जगहों पर बीए, बीएससी व बीकॉम की सीटें खाली बचती थीं।

बावजूद इसके सरकारी कॉलेजों में इवनिंग क्लासेज लांच की गई। यहां शिक्षकों की भर्ती भी कर ली गई है। यह बात अलग है कि इन कॉलेजों में इवनिंग क्लासेज की सीटें नहीं भर पाई हैं।

एक्ट बन गया परेशानी
दरअसल, अशासकीय महाविद्यालयों में शिक्षक की भर्ती प्रक्रिया में एक एक्ट आड़े आ रहा है। इन कॉलेजों में शिक्षकों की भर्ती के लिए बनने वाली चयन समिति का अध्यक्ष प्रबंधन का पदाधिकारी होता है।

लेकिन सरकार चाहती है कि यहां इवनिंग क्लासेज के लिए डीएम स्तर पर ही शिक्षकों की भर्ती हो जाए। इस पर अशासकीय महाविद्यालय ऐतराज जता रहे हैं। इस संबंध में कई बार अशासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्य, निदेशक और सचिव स्तर पर मांग भेज चुके हैं, लेकिन शिक्षक भर्ती का रास्ता साफ नहीं हो पाया है।

180 दिन पूरे होने मुश्किल
जितनी तेजी से सत्र बीत रहा है, उस लिहाज से 180 दिन का शिक्षण सत्र पूरा होना मुश्किल है। यूजीसी के निर्देशानुसार और हाईकोर्ट के आदेशों के तहत मॉर्निंग हो या इवनिंग, 180 दिन का शिक्षण अनिवार्य है।

श्रीदेव सुमन विवि का सत्र अगस्त में शुरू हो गया था, लेकिन यहां नवंबर आने तक भी विवि से संबद्ध इवनिंग क्लासेज का शिक्षण शुरू नहीं हो पाया है।

मॉर्निंग की संबद्धता प्रक्रिया भी अटकी
सरकार ने यह भी घोषणा की थी कि इसी सत्र से गढ़वाल विवि से संबद्ध डिग्री कॉलेजों को असंबद्ध करके, श्रीदेव सुमन विवि से संबद्धता की जाएगी। लेकिन यह प्रकरण भी एक्ट के बीच में फंस गया।

एक ओर श्रीदेव सुमन विवि के एक्ट में ऐसा प्रावधान नहीं था तो दूसरी ओर केंद्रीय गढ़वाल विवि के एक्ट के मुताबिक असंबद्ध करने के लिए कुछ बदलाव करने थे। जिसकी फाइल मानव संसाधन विकास मंत्रालय में धूल फांक रही है।

अशासकीय महाविद्यालयों में शिक्षक भर्ती के लिए अब तक दिशा निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। हम कालेजों की मांग पर लगातार प्रयास कर रहे हैं कि हल निकाला जाए, लेकिन निदेशालय की ओर से कोई भी फाइल नहीं आई।
- डॉ. एनपी माहेश्वरी, उपनिदेशक, उच्च शिक्षा निदेशालय

एडमिशन ले लिया, पढ़ाने वाला नहीं
देहरादून के डीबीएस पीजी कॉलेज में इवनिंग क्लासेज में एडमिशन लेने वाले छात्र शिक्षक नहीं होने की वजह से आंदोलन की राह पर हैं। छात्रों ने बुधवार को प्राचार्य को घेरा। चेतावनी दी कि अगर जल्द शिक्षक न आए तो वह कालेज नहीं चलने देंगे।

इवनिंग क्लासेज के छात्र बुधवार को प्राचार्य डॉ. ओपी कुलश्रेष्ठ के पास पहुंचे। छात्रों का कहना था कि जब शिक्षक की व्यवस्था नहीं थी तो उन्हें दाखिला क्यों दिया गया?

छात्रों का यह भी कहना था कि कॉलेज प्रशासन की ओर से मॉर्निंग की कक्षाओं में उन्हें एडजस्ट किया जा रहा है, लेकिन वहां इतनी भीड़ हो जाती है कि बैठने की जगह नहीं मिलती।

पूर्व छात्र संघ महासचिव देवेंद्र और वर्तमान सचिव विपुल गौड़ ने कहा कि कॉलेज प्रशासन जल्द शिक्षकों की व्यवस्था कराए, नहीं तो वह मॉर्निंग शिफ्ट की कक्षाएं चलने नहीं देंगे। इस पर प्राचार्य ने उनका ज्ञापन शासन और उच्च शिक्षा निदेशालय तक भेजने को कहा और जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद छात्र लौट गए।
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