भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. आर. चिदंबरम ने कहा कि नेशनल नॉलेज नेटवर्क प्रोजेक्ट के तहत देश की कक्षाएं आने वाले समय में ई-क्लासरूम के माध्यम से एक दूसरे से जोड़ी जाएंगी।
इस प्रोजेक्ट में 10 गीगाबाइट प्रति सेकेंड का कोर ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क होगा, जो शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी साबित होगा। एमिटी यूनिवर्सिटी में 18वें सर सीवी रमन मेमोरियल लेक्चर के दौरान उन्होंने ये बातें कहीं।
यह कार्यक्रम इंस्टीट्यूशन्स ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग (आईईटीई) के तत्वावधान में आयोजित किया गया। इस मौके पर डॉ. चिदंबरम ने कहा कि प्रायोगिक शोध, तकनीकी विकास, उच्चकोटि का कौशल निर्माण और नावाचार के बिना बुनियाद अनुसंधान समृद्धि और सुरक्षा नहीं ला सकता।
उन्होंने कहा कि ज्ञान अर्थव्यवस्था, सतत विकास और सभी वर्गों तक पहुंच बनाने के लिए इनोवेशन (नवोन्मेष) की सबसे बड़ी भूमिका है। शिक्षण संस्थानों में होने वाले शोध के लिए विज्ञान युक्त सुविधाएं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत है।
डॉ. चिदंबरम ने कहा कि देश इस समय तीसरे औद्योगिक क्रांति के मध्य में है, जो इंटरनेट, रोबोटिक्स, उत्पादकता और उच्च तकनीक का अद्भुत संगम है। इस मौके पर एमिटी के संस्थापक डॉ. अशोक कुमार चौहान ने कहा कि रिसर्च और इनोवेशन किसी भी देश के विकास का केंद्र बिंदु होता है। कार्यक्रम में आईईटीई के अध्यक्ष डॉ. एस. पाल ने भी अपने विचार रखे।