इतिहास की अलग-अलग किताबों को पढ़ने में भले ही बोरियत का अहसास हो, लेकिन बदलावों को सहज तरीके से बताने के प्रयास में दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र जुटे हुए हैं।
1857 के गदर की कहानी हो या फिर गदर से जुड़े ऐतिहासिक स्मारक, या फिर आजादी की पहली लड़ाई के बाद से अब तक स्मारकों के डिजाइन से लेकर भाषा और संगीत के क्षेत्र में क्या बदलाव हुए, इन सारी जानकारियों को लोगों तक पहुंचाने के लिए डीयू के छात्र एक वेबसाइट तैयार कर रहे हैं।
डीयू क्लस्टर इनोवेशन सेंटर में बीटेक ह्यूमनिटीज की को-ऑर्डिनेटर डॉ. सुकृता पाल सिंह ने बताया कि विभिन्न स्तरों पर छात्र 1857 से जुड़े कई ऐतिहासिक टूरिज्म प्रोजेक्ट तैयार कर रहे हैं। इनको एक साथ कर एक हेरिटेज से संबंधित वेबसाइट तैयार की जाएगी।
इस वेबसाइट को बहुत ही इंटरेक्टिव बनाया जाएगा। इससे एक क्लिक पर न केवल स्मारक से जुड़ी जानकारी मिलेगी, बल्कि उस समय की भाषा, स्मारकों के डिजाइन और संगीत से भी रूबरू हुआ जा सकेगा।
प्रोजेक्ट के तहत छात्र लाल किले की यात्रा कर चुके हैं। अब अगले चरण में मेरठ और लखनऊ के इलाकों में जाएंगे। इसके लिए भारतीय पुरातत्व विभाग से भी सहयोग लेने की योजना है। इस तरह प्रोजेक्ट से देश में ऐतिहासिक टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।
इसके साथ ही इतिहास से संबंधित एक फ्लैश ऐप भी लाने की योजना है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले छात्रों का एक समूह डीयू के आसपास बिखरे इतिहास को एक फिल्म में बनाने का काम कर चुका है।
छात्रों को मिलेंगे अंक
डॉ. सुकृता पाल ने बताया कि इस तरह के प्रोजेक्ट करने के लिए छात्रों को अंक मिलते हैं। लिहाजा इन प्रोजेक्ट से जुड़े छात्र बढ़-चढ़कर काम कर रहे हैं। इस तरह के प्रोजेक्ट के लिए विभाग भारतीय पुरातत्व विभाग और इंटेक के संपर्क में भी है। इससे छात्रों में और भी उत्साह भी रहता है।