दिल्ली हाईकोर्ट ने छात्र संघ चुनावों (डूसू) चुनावों में प्रत्याशियों के नाम बैलेट पेपर पर लाटरी के जरिए निकालने का निर्देश देने संबंधी याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा अदालत द्वारा तय करने का नहीं है। याचि ने तर्करखा था कि जिस प्रत्याशी का नाम पहले आए उसका नाम मतपत्र पर पहले लिखा जाए।
न्यायमूर्ति मनमोहन के समक्ष यह याचिका ऑल इंडिया स्टूडेंट यूनियन (आइसा) व दो अन्य छात्रों ने दायर की थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचि चुनावों के बाद याचिका दायर कर सकते है।
डूसू के चुनाव 12 सितंबर को तय है और 3 सितंबर को छात्रों ने नामांकन करना है। याचि ने तर्क रखा कि वर्तमान में चुनावों में खडे़ होने वाले प्रत्याशियों के नाम के एल्फाबेटिकल को ध्यान में रखकर बैलेट पेपर पर अंकित किया जाता है। उन्होंने कहाकि चुनावों में छात्र अपने कॉलेजों के चुनाव में रूची रखते है और डूसू चुनाव में ज्यादा ध्यान नहीं देते। यही कारण है कि करीब 50 हजार में से पांच पांच से सात हजार छात्र ही चुनावों में भाग ले पाते है।
उन्होंने कहा कि इसी के कारण चुनाव लड़ने वाले अधिकांश छात्र नेता अपने नाम ए से शुरू करते है ताकि उनका नाम बैलेट पेपर मेंपहले आ जाए और इसका उनको छात्रों की अरूची के कारण फायदा भी पहुंचता है। यह सरासर समानता के अधिकार का हनन है। अत: चुनाव प्रभारी को निर्देश दिया जाएकि लाटरी सिस्टम से नाम तय कर बैलेट पेपर पर दर्ज किया जाए।