पंजाब सरकार की सेवाओं में अब नशे की आदी लोगों का प्रवेश नहीं हो पाएगा। नौकरी के लिए आवेदकों को डोप टेस्ट भी पास करना होगा।
मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने वीरवार को राज्य सरकार के सभी विभागों में भर्ती प्रक्रिया के दौरान ‘डोप टेस्ट’ अनिवार्य किए जाने संबंधी संबंधित प्रस्ताव पर सहमति जता दी।
मुख्यमंत्री ने यह फैसला नशा छुड़ाओ एवं पुनर्वास प्रबंध संबंधी एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान लिया। उन्होंने भरती के मौजूदा नियमों में संशोधन करने के साथ ही इस नई व्यवस्था को शामिल करने के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए।
उन्होंने कहा कि सरकारी सेवाओं में चुने जाने वाले व्यक्ति को मेडिकल टेस्ट के दौरान ही डोप टेस्ट भी अनिवार्य रूप से देना होगा।
बादल ने कहा कि नशे से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए यह फैसला समय की जरूरत है। बैठक में उपस्थित डिविजनल आयुक्तों को मुख्यमंत्री ने अपने-अपने क्षेत्रों में स्थित नशा छुड़ाओ केंद्रों का दौरा करने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने कहा कि इन केन्द्रों की प्रभावी निगरानी बहुत जरूरी है, ताकि उपचार की बढ़िया सुविधाएं मुहैया करवाई जा सकें।
फैसला युवाओं में नशे का सेवन रोकेगाः बादल
बादल ने कहा कि अगर आवेदक डोप टेस्ट में फेल हुआ तो उसे सरकारी नौकरी नहीं दी जाएगी। यह फैसला न केवल युवाओं को नशे का सेवन करने से रोकेगा, बल्कि भविष्य में केवल स्वस्थ अधिकारी और कर्मचारी ही सरकारी सेवाओं में होंगे।