लखनऊ विश्वविद्यालय में हिंदी के सिलेबस बदलाव पर शिक्षकों में मतभेद के तहत प्रति कुलपति ने विभाग के सभी शिक्षकों के साथ बृहस्पतिवार को बैठक की।
इसमें बदलाव के पक्षधर और विरोधी दोनों शिक्षकों ने अपने-अपने पक्ष रखें। सिलेबस बदलाव पर फैसला शनिवार को होने वाली फैकल्टी बोर्ड की बैठक में किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि लविवि का शैक्षिक सत्र 16 जुलाई से शुरू हो चुका है। सत्र शुरू होने के दो महीने बाद हिंदी का सिलेबस बदलने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। विभाग के शिक्षकों के साथ ही कॉलेजों ने इस पर काफी आपत्ति दर्ज कराई।
केकेसी, केकेवी समेत कई कॉलेजों ने प्रस्तावित कोर्स परिवर्तन के खिलाफ कुलपति के पास लिखित शिकायत दर्ज कराई है। हिंदी विभाग में भी शिक्षकों का एक वर्ग कोर्स में प्रस्तावित बदलाव को मंजूर नहीं कर रहा है।
यह वर्ग प्रस्तावित पाठ्यक्रम से मैथिलीशरण गुप्त, आचार्य रामचंद्र शुक्ल और महादेवी वर्मा सहित उपन्यास ‘झांसी की रानी’ को हटाने से नाराज है।
शिक्षकों की नाराजगी कोर्स में विवादित पुस्तक ‘मुर्दहिया’ को शामिल करने पर भी है। प्रति कुलपति प्रो. एके सेनगुप्ता ने बताया कि शिक्षकों की बातें सुन ली गई हैं, लेकिन सिलेबस चेंज पर फैसला फैकल्टी बोर्ड की बैठक में ही होगा।