हंगामा डीएवी कालेज की तो पहचान बन चुका है, लेकिन अब डीबीएस भी इसी राह पर चलता नजर आ रहा है। ज्यादा वक्त नहीं बीता, डीबीएस कालेज कुछ साल पहले तक पढ़ाकू छात्रों के लिए जाना जाता था। यह वो कालेज था, जिसका रुख मेरिटोरियस ही करते थे। लेकिन इस बार प्रवेश प्रक्रिया पर 24 जून से शुरू हुआ विवाद लगातार बढ़ रहा है। यहां तक कि कालेज में प्राचार्य तक से छात्रनेता धक्कामुक्की पर उतर आए हैं।
कालेज की छवि पर बढ़ते दागों ने पूर्व शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है।
डीबीएस कालेज में हंगामे के बाद तीन दिनों के लिए ताला लटक गया है। मेरिट के दम पर कालेज में बीएससी और एमएससी करने आने वाले छात्रों को इससे गहरा झटका लगा है। पहले फार्म जमा करने के दौरान बवाल के चलते कई दिन कालेज बंद रहा था। अब एडमिशन शुरू होने से ठीक पहले हंगामा होने के बाद कालेज बंद है।
कालेज के शिक्षक संघ के अध्यक्ष डा. एके बियानी कहते हैं कि लंबे समय तक बंद रहने से महाविद्यालय की छवि धूमिल हो रही है। कहा कि बातचीत में महाविद्यालय के ही छात्रसंघ पदाधिकारी आते तो हालात न बिगड़ते। उन्होंने मौजूदा हालात के लिए बाहरी छात्रों के हस्तक्षेप को जिम्मेदार ठहराया।
कालेज में 39 साल तक वनस्पति विज्ञान के शिक्षक रहे डा. महेश भंडारी का कहना है कि अब न तो पहले जैसे शिक्षक रहे हैं और न ही छात्र। दोनों में सहनशीलता खत्म हो गई है। कालेज हमेशा मेरिट के लिए मशहूर रहा। यह नियम बरकरार रखा जाना चाहिए। शिक्षकों को गरिमा का ख्याल रखना चाहिए और छात्रों को भी अपने गुरुजनों को सम्मान देना चाहिए।
प्रमुख सचिव से मिले छात्र
डीबीएस कालेज के छात्र प्रतिनिधिमंडल ने बृहस्पतिवार को प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा राधा रतूड़ी से मुलाकात की। छात्रों का आरोप था कि कालेज प्रशासन के प्रॉस्पेक्टस जमा करने से यह हालात पैदा हुए हैं। मामले को लेकर राधा रतूड़ी ने फोन पर प्राचार्य डा. कुलश्रेष्ठ से बात की तो उन्होंने अपनी समस्या बताई।
प्रमुख सचिव ने शुक्रवार को प्राचार्य को छात्र नेताओं से वार्ता करने को कहा। वहीं, कालेज प्राचार्य का कहना है कि 980 सीटों पर 1849 छात्रों को बिना मेरिट के दाखिला देना संभव नहीं है। प्रतिनिधिमंडल में प्रदीप कुमार, संकेत नौटियाल, संदीप धीमान, संदीप चमोली, विजय राज चौहान आदि मौजूद रहे।
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