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राजनीति में उतरने को तैयार डीएवी की नई पीढ़ी

Tue, 29 Oct 2013 07:56 PM IST
आफताब अजमत/अमर उजाला, देहरादून
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देश व उत्तराखंड को कई नामी नेता दे चुके डीएवी पीजी कॉलेज की नई पीढ़ी राजनीति में उतरने को तैयार है। कॉलेज के कई पूर्व छात्र नेता नवंबर में आयोजित होने वाले जिला पंचायत चुनावों में अपना भाग्य आजमाएंगे। खास बात यह है कि डीएवी में राजनीति के दौरान बने वोटर और संपर्क उनके लिए काम के साबित हो सकते हैं।
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डीएवी कॉलेज के पूर्व छात्र संघ महासचिव अनिल तोमर साहिया से जिला पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। अनिल ने बताया कि इस चुनाव के लिए उन्होंने कॉलेज स्तर से ही तैयारी शुरू की थी।

चुनाव जीतने की पूरी उम्मीद
जौनसार बावर के युवाओं की समस्याओं को न केवल कॉलेज स्तर बल्कि कॉलेज से बाहर भी उन्होंने हमेशा सुना है। इसलिए उन्हें चुनाव जीतने की पूरी उम्मीद है।

कॉलेज के पूर्व महासचिव भगवती प्रसाद अपने गांव की ओर से तांगड़ा घाट, चमोली से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ने जा रहे हैं। भगवती इन दिनों चुनावी तैयारियों के मद्देनजर गांव में डटे हुए हैं। उन्होंने बताया कि डीएवी की राजनीति ने उन्हें इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है।
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कई साल कड़ी मेहनत
डीएवी में आर्यन ग्रुप के प्रवक्ता अनिल उनियाल चमोली जिले के कोटली से चुनावी तैयारियां में जुटे हैं। अनिल ने इसके लिए कई साल कड़ी मेहनत की है। दूसरी ओर डीएवी के ही छात्र नेता प्रशांत जोशी घनसाली से चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने भी इसके लिए काफी दिन पहले से ही मेहनत शुरू कर दी थी।

वर्तमान महासचिव भी लड़ेगा चुनाव
डीएवी कॉलेज का वर्तमान छात्र संघ महासचिव जोगेंद्र रावत भी जिला पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। उन्होंने बताया कि वह अपने क्षेत्र बंजारावाला से चुनावी मैदान में उतरेंगे। इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। बकौल जोगेंद्र, डीएवी में हाल ही में चुनाव जीतने के बाद उन्हें शहर में एक अलग पहचान मिली है।

डीएवी से मिली प्रेरणा
डीएवी कॉलेज के इतिहास में कई नामी राजनीतिक हस्तियों के नाम दर्ज हैं। इनमें वर्तमान कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना से लेकर पूर्व विकासनगर विधायक कुलदीप का नाम भी दर्ज है। कॉलेज से बाहरी राजनीति में कदम रखने जा रहे यह युवा भी न केवल इन नेताओं को एक आदर्श के तौर पर देखते हैं बल्कि कॉलेज में पढ़ने वाले दुर्गम पहाड़ी इलाकों के छात्रों तक उनकी पहुंच भी आसानी से बन जाती है।
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