किसी ने चंडीगढ़ के प्रशासक शिवराज पाटिल को गुमनाम पत्र लिखकर सरकारी स्कूलों में बच्चों की कंप्यूटर एजूकेशन के लिए चलाए जा रहे सीटॉस प्रोग्राम में करोड़ों के गोलमाल की शिकायत की है।
शिकायत में इस प्रोग्राम को चलाने वाली सोसाइटी फॉर प्रमोशन ऑफ आईटी इन चंडीगढ़ (स्पिक) के एक अधिकारी पर फर्जी तरीके से छह फर्मोें को ही सीटॉस का काम देने का आरोप लगाया है। यह शिकायत 19 अक्तूबर 2013 को पंजाब राज भवन में प्रशासक शिवराज पाटिल के नाम दी गई थी।
शिकायत के बाद चंडीगढ़ प्रशासन के आईटी विभाग की ओर से मामले पर जल्द जांच शुरू कराने की तैयारी है। मामले में संबंधित अधिकारियों से भी जवाब तलब किया जा सकता है।
शहर के सरकारी स्कूलों में हर साल 15 हजार बच्चों को सीटॉस प्रोग्राम के तहत कंप्यूटर की शिक्षा दी जाती है। इस प्रोग्राम को चलाने की जिम्मेदारी सेक्टर-32 स्थित सरकारी संस्था रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंग्लिश (आरआईई) के अलावा पांच अन्य कंपनियाें को सौंपी गई है।
तीन कंपनियों का प्रयोग तो सिर्फ बिल बनाने के लिए किया जाता है। शिकायत में कहा गया है कि सभी सरकारी स्कूलों में चल रहे सीटॉस प्रोग्राम के लिए प्रशिक्षकों को सिर्फ 2500 रुपये वेतन दिया जाता और विरोध करने पर नौकरी से निकाल दिया जाता।
शिकायत में कहा गया है कि पिछले छह सालों से सीटॉस प्रोग्राम में करोड़ों का घपला किया जा रहा है। शिकायत में शहर के कई सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपल पर भी मिलीभगत का आरोप लगाया गया है।
शिकायत में सीटॉस संबंधी कुछ अन्य जानकारी
सीटॉस के लिए प्रति वर्ष 2 करोड़ बजट है।
-इस प्रोजेक्ट से जुड़ी प्रत्येक फर्म को सालाना 20 से 25 लाख भुगतान हो रहा है।
-कांट्रेक्ट रिन्यू करने के लिए कोई ठोस मापदंड नहीं अपनाए जाते।
-प्रशिक्षण देने वाले 75 फीसदी से अधिक लोग योग्य नहीं होने का आरोप है।
सीटॉस प्रोग्राम में 9वीं से 11वीं तक हर साल एक ही सिलेबस कराया जाता है।