प्रदेश विश्वविद्यालय में फीस बढ़ाए चार महीने होने को आए हैं, लेकिन अभी तक इस मसले पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। सरकार की ओर से गठित कमेटी और शिक्षा विभाग ने मामले में चुप्पी साध ली है। कोई भी अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। करीब एक माह पूर्व कमेटी ने सरकार को जो रिपोर्ट सौंपी है, उसकी सिफारिशों को भी सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है।
हाई पावर कमेटी की रिपोर्ट कहां गई, इस पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। प्रधान सचिव शिक्षा ने कहा था कि कमेटी की रिपोर्ट असेसमेंट के लिए शिक्षा विभाग को भेजी है। उधर, शिक्षा विभाग के अधिकारी कह रहे हैं कि उनके पास ऐसी कोई रिपोर्ट आई ही नहीं है। ऐेसे में सवाल उठता है कि हाई पावर कमेटी रिपोर्ट कहां गायब हो गई। या फिर सरकार और विभाग ने जानबूझ कर मामले में चुप्पी साध ली है।
कई गुना फीस बढ़ाई गई
विवि प्रबंधन ने अगस्त में फीस वृद्धि कर छात्रों को बड़ा झटका दिया। कुछ विषयों में यह फीस 900 गुना तक बढ़ाई गई। फीस वृद्धि का छात्र संगठनों ने विरोध जताया और प्रदर्शन किए। प्रदेश स्तर पर विरोध के चलते सरकार ने कमेटी बनाई। बताया जा रहा है कि कमेटी ने भी फीस वृद्धि की सिफारिश की है। हालांकि, इसे सार्वजनिक नहीं किया गया।
सरकार की ओर से गठित कमेटी की रिपोर्ट पर सरकार जो भी आदेश जारी करती है, उसका अनुपालन किया जाएगा। अभी तक इस संबंध में कोई निर्देश नहीं मिले हैं।
- एडीएन बाजपेयी, वीसी एचपीयू
विभाग की ओर से असेसमेंट करवाने को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं कर सकता हूं। दो दिन से आउट ऑफ ऑफिस हूं।
- शशिभूषण सेखरी, निदेशक उच्चतर शिक्षा