सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को सेशन के पहले दिन से फ्री में मिलने वाली किताबें मिलेगी या नहीं। अब यह मामला निर्वाचन आयोग में पहुंच गया है।
बोर्ड ने निर्वाचन आयोग को एक पत्र लिखा है। जिसमें स्कूलों को किताबें बांटने संबंधी अनुमति मांगी गई है। जैसे ही निवार्चन आयोग की तरफ से हरी झंडी मिलेगी। बच्चों को किताबें मुहैया करा दी जाएंगी।
यह जानकारी बुधवार को बोर्ड की चेयरपर्सन डॉ. तेजिंदर कौर धालीवाल ने सांझा अध्यापक मोर्चा के प्रतिनिधियों के साथ मीटिंग में दी। इस दौरान सांझा अध्यापक मोर्चे ने बच्चों को फ्री में दी जाने वाली किताबों का मामला उठाया।
इस पर चेयरपर्सन ने बताया कि 80 प्रतिशत से अधिक किताबें बोर्ड ने जिला डिपुआें पर पहुंचा दी हैं। जबकि रहती किताबों को छापने की प्रक्रिया चल रही है।
उन्होंने बताया कि जैसे ही निवार्चन आयोग से किताबें बांटने के लिए मंजूरी मिल जाएगी। बच्चाें को किताबें मुहैया करा दी जाएंगी। मोर्चे के मेंबरों ने 11वीं और 12वीं कक्षा की आर्ट्स, कॉमर्स और साइंस ग्रुप की पढ़ाई कॉलेजों में कराने का विरोध किया।
उन्होंने कहा कि यह फैसला कोठारी कमीशन के निर्देशों एवं एजुकेशन पॉलिसी के खिलाफ है। साथ ही मांग उठाई कि इस फैसले को वापस लिया जाए। चेयरपर्सन ने मोर्चे की मांग को जायजा ठहराया और कहा कि यह मामला राज्य सरकार का है। जल्दी ही इस बारे में सरकार को पत्र लिखा जाएगा। उत्तर पुस्तिकाओं के चैक करने की बात पर चेयरपर्सन ने विश्वास दिलाया कि जून के बाद दूसरी किश्त में पैसे बढ़ाकर ही अदायगी की जाएगी।
बैंकों से प्रश्नपत्र लेने में सुपरिटेंडेंट को परेशानी
पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने इस बार प्रश्नपत्र को लीक होने से बचाने के लिए बैंकों के माध्यम से प्रश्नपत्र भेजे हैं। परीक्षा वाले दिन ही प्रश्नपत्र स्कूल को दिए जाते हैं। कई जगह स्कूलों से बैंक काफी दूर हैं।
जिससे स्टाफ को काफी परेशानी आती है। यह मामला भी मीटिंग में उठा। इसके बाद तय किया गया कि अगले वर्ष बैंकों की संख्या बढ़ाई जाएगी। साथ ही अन्य प्रबंधक भी पूरे किए जाएंगे। इस मौके पर भूपिंदर सिंह, शिवकुमार, हरनेक सिंह मावी समेत कई टीचर नेता हाजिर थे।