देश की नंबर वन पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के लिए बुधवार का दिन काफी खास रहा। अंतरिक्ष में मंगलयान मिशन सफल होते ही पीयू के फिजिक्स विभाग के असिस्टेंट प्रो. डा. संदीप सहजपाल को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने तीन साल पहले मंगल की फाउंडेशन (मंगल निर्माण कैसे हुआ) का शोधकार्य संबंधी रिसर्च प्रोजेक्ट डा. संदीप को दिया था।
प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए 6 लाख की राशि मिली। मंगल यान मिशन की शुरुआत से पहले ही डा. संदीप ने इस प्रोजेक्ट को पूरा कर इसरो को सौंप दिया। वहीं हरियाणा के यमुनानगर एक लाडली अनुभूति बंसल इसरो में इन ऐतिहासिक और यादगार क्षणों की गवाह बनी हैं। अनुभूति इसरो में पिछले करीब चार साल से वैज्ञानिक हैं।
एक अन्य प्रोजेक्ट भी मिला है संदीप को
इसरो ने डा. सहजपाल को 7 लाख का एक अन्य प्रोजेक्ट भी 3 साल के लिए दिया है। इस प्रोजेक्ट पर भी वह शोधकर्ता गुरप्रीत के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 19-20 अगस्त को भी मंगल यान से जुड़े साइंटिस्टों की वर्कशॉप में उन्होंने शोधकार्य को पेश किया था।
मोदी ने की गुरु की तारीफ तो गदगद हुए डा. संदीप
डा. संदीप सहजपाल के लिए बुधवार उस समय और भी शुभ हो गया, जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में उनके गुरु प्रो. जेएन गोस्वामी का नाम लिया।
संदीप ने बताया कि उन्होंने फिजिकल रिसर्च लैब (पीआरएल) अहमदाबाद के डायरेक्टर प्रो. गोस्वामी के अधीन ही शोधकार्य (पीएचडी) किया है। डा. संदीप ने सेक्टर-20 स्थित गवर्नमेंट स्कूल और फिर डीएवी कालेज-10 से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है।
हरियाणा इंजीनियरिंग कॉलेज की स्टूडेंट है अनुभूति
अनुभूति ने वर्ष 2008 में हरियाणा इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्यूनिकेशन में बीटेक किया था। इसमें वह यूनिवर्सिटी टॉपर रही। इसके बाद पटियाला की थॉपर यूनिवर्सिटी में उसका एमटेक में दाखिला हुआ। काफी होनहार होने के कारण उसका थॉपर यूनिविर्सिटी में स्कॉलरशिप के लिए भी चयन हो गया।
बीटेक करने के कुछ समय बाद ही अनुभूति ने इसरो का एग्जाम दिया था। जब इसका रिजल्ट आया तो उसके लिए एक बार फिर खुशी का मौका आया। अनुभूति का इसरो में साइंटिस्ट के पद पर सलेक्शन हो गया था। अनुभूति के सामने दो ही विकल्प थे। पहला वह अपनी एमटेक की पढ़ाई पूरी करें और दूसरा एमटेक छोड़कर वह इसरो ज्वाइन कर ले।
अनुभूति ने एमटेक करने के बजाय इसरो ज्वाइन करने का निर्णय लिया और एमटेक में की गई छह महीने की पढ़ाई छोड़ दी। अनुभूति के बारे में हरियाणा इंजीनियरिंग कॉलेज की रजिस्ट्रार प्रतिभा ने कहा कि अनुभूति शुरू ही पढ़ाई में काफी जीनियस रही है।
थॉपर यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में उसका दाखिला हो गया और उसका स्कॉलरशिप के लिए भी चयन हो गया। उन्हें पूरी उम्मीद है कि इसरो में साइंटिस्ट बनने के बाद अनुभूति एक दिन जिले और प्रदेश का नाम रोशन करेगी।
मंगल मिशन से दुनिया में बढ़ेगा भारत का वर्चस्व
डा. संदीप ने कहा कि मंगलयान की सफलता के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी बड़े मायने हैं। इससे अमेरिका, यूरोपीय देशों में भी भारत का वर्चस्व बढ़ेगा। एयरो टेक्नोलॉजी के बल पर आर्थिक तौर पर भी भारत को काफी लाभ मिल सकता है।
आखरी क्षणों तक टीवी से चिपके रहे
पीयू कैंपस के गेट नंबर-3 के पास मकान नंबर ई-1-10 में रहने वाले डा. संदीप सहजपाल के लिए अंतरिक्ष में मंगलयान की कामयाबी जिंदगी के यादगार पलों में शुमार हो गई। सुबह 6 बजे से करीब 8.15 बजे तक अंतरिक्ष में मंगल यान के स्थापित होने तक टीवी से चिपके रहे।
पूरा परिवार डा. सहजपाल के साथ मंगल यान की सफलता के लिए दुआ कर रहा था। जैसे ही टीवी पर मोम से सिग्नल मिलने की जानकारी मिली, सहजपाल कुछ पलों के लिए इसपर विश्वास ही नहीं कर पाए।
ये होंगे मंगल मिशन के फायदे
मंगलयान की सफलता से अगले छह महीनों में मंगल ग्रह के बारे में काफी कुछ जानने का मौका मिलेगा।
-मंगल पर जीवन की संभावनाओं को तलाशा जाएगा।
-मंगलयान पर लगे कैमरों से तस्वीरें मिल सकेंगी।
-मंगल निर्माण से जुड़ी काफी जानकारी मिल सकेगी।
-मिथेन सेंसर को मंगल पर भेजा गया है।
-मंगल पर पानी खत्म होने संबंधी जानकारी मिल सकती है।