समय से दाखिले न परीक्षाएं। पिछला सत्र ही एक साल लेट हो गया।
नए सत्र के तो दाखिले ही शुरू नहीं हुए। यह हाल बीटीसी की पढ़ाई का है।
अब भी समय से परीक्षाएं हो जाएं तो भी दो साल का बीटीसी तीन साल में पूरा हो पाएगा।
बीएड से छात्रों के मोहभंग के बाद कॉलेज संचालक, छात्र और अभिभावक बीटीसी की इस दुर्दशा से काफी चिंतित हैं।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद से जब प्रदेश में भारी संख्या में प्राइमरी शिक्षकों की दरकार की बात उठी तो निजी क्षेत्र में बीएड और बीटीसी कॉलेजों की बाढ़ सी आ गई।
नौकरी की उम्मीद बढ़ते देख युवाओं ने भी इन कोर्स में दाखिला लेने में खूब रुचि दिखाई। अब बीएड से तो युवाओं का मोहभंग हो चुका है।
इस साल प्रदेश में कई दौर की काउंसलिंग के बाद सीटें ही नहीं भर पाईं। कॉलेज संचालक भी परेशान होकर मान्यता वापस करने लगे।
अब सभी की चिंता बीटीसी को लेकर है। बीटीसी का 2012-13 सत्र जुलाई 2012 में शुरू हो जाना चाहिए था। इस सत्र के दाखिले ही जुलाई 2013 तक चले।
एक साल देर तक तो दाखिले ही होते रहे। अगला सत्र 2013-14 जुलाई से शुरू हो जाना चाहिए था लेकिन अभी इसकी मेरिट लिस्ट जारी हुई है। अब काउंसलिंग शुरू होगी। काउंसलिंग प्रक्रिया भी ऐसी है कि साल भर चलती है।
लखनऊ के महाबीर प्रसाद डिग्री कॉलेज के प्रबंधक अवधेश सिंह बताते हैं कि उन्हें पिछले सत्र के छात्र ही इस साल अप्रैल में मिले।
अभी एक भी सेमेस्टर की परीक्षा नहीं हुई। इसी तरह स्वामी विवेकानंद इंटर कॉलेज के प्रबंधक मोहन सिंह भी बताते हैं कि सत्र 2012-13 की पहले सेमेस्टर की परीक्षाएं अभी नहीं हुई हैं।
ये दिसंबर तक होंगी। मेरठ के सीएसडी कॉलेज ऑफ एजुकेशन के प्रबंधक सुभाष गुर्जर भी कहते हैं कि समय से दाखिले और परीक्षाएं नहीं होंगी तो इससे छात्रों का मोहभंग होगा ही।
बीएड में भी सरकार की गलत नीतियों के कारण छात्र नहीं मिले। सरकार यही हाल अब बीटीसी में कर रही है। इस बाबत परीक्षा नियामक प्राधिकारी मीना श्रीवास्तव से बात करने की कोशिश की गई लेकिन वह उपलब्ध नहीं हुईं।
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