देहरादून में यूएपीएमटी परीक्षा में आरक्षण के नियम दलालों के लिए चांदी काटने का जरिया बन गए हैं। पकड़े गए 15 में से दस छात्रों के एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के बदले परीक्षा देने से यह बात पुष्ट होती है कि दलाल इस वर्ग के छात्रों को जाल में फांसकर बिना मेहनत किए प्रवेश दिलाने का झांसा देते हैं।
यूएपीएमटी परीक्षा में उत्तराखंड शासन के निर्देशों के तहत प्रदेश के एससी छात्रों को कुल सीटों में 19 प्रतिशत, एसटी को चार प्रतिशत और ओबीसी को 14 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है।
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आरक्षण नियमों के चलते सामान्य वर्ग में मेरिट काफी हाई जाती है, जिससे दलालों के लिए इस वर्ग के छात्रों को कामयाबी का भरोसा दिलाना मुश्किल होता है। दूसरी ओर, मेधावी छात्रों को आरक्षित वर्ग के छात्रों की जगह बिठाकर अच्छे अंक हासिल हो जाते हैं।
सामान्य वर्ग के छात्र को प्रवेश के लिए कम से कम 50 प्रतिशत अंक हासिल करने होते हैं, जबकि एससी, एसटी, ओबीसी के लिए यह मानक महज 40 प्रतिशत का है। यानी दलालों की दावा भी पक्का और ग्राहक का काम भी पूरा।
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फर्जी परीक्षार्थियों के मुताबिक प्रदेश में आरक्षित वर्ग की सीटों पर लाखों रुपए का दांव खेला गया था। उन्हें परीक्षा में बैठने के बदले 50 हजार रुपए से लेकर एक लाख रुपए दिए गए।
सभी उत्तराखंड के छात्र
जिन असली छात्रों के बदले में फर्जी छात्र परीक्षा दे रहे थे, वे सभी उत्तराखंड निवासी हैं। मूल निवासी होने से उन्हें दाखिले में आरक्षण का पूरा लाभ मिलना तय था। इनमें भी अधिकतर हरिद्वार के हैं। फर्जी छात्र परीक्षा देने में कामयाब हो जाते तो इन छात्रों का बीएएमएस या बीएचएमएस में दाखिला पक्का हो जाता।