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डीयू दाखिला: 'अच्छे दिन, डिग्री बिन'

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दिल्ली यूनिवर्सिटी में बीते सत्र में शुरू हुआ कोर्स बैचलर विद ऑनर्स इन मैनेजमेंट स्टडीज (बीएमएस) मौजूदा सत्र में खत्म कर दिया गया है।
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तीन वर्षीय पाठ्यक्रम की वापसी के साथ ही अब सत्र 2012-13 तक चल रहे बैचलर ऑफ  बिजनेस स्टडीज (बीबीएस) और बीए ऑनर्स इन बिजनेस इकोनॉमिक्स (बीबीई) में दाखिला होगा।

सत्र 2013-14 में दाखिला लेकर पढ़ रहे बीएमएस के छात्रों पर सोमवार को यूजीसी की स्टैंडिंग कमेटी की प्रस्तावित बैठक में कोई फैसला लिया जाएगा।

सिर्फ एक कॉलेज में है बीएफआईए

डीयू के प्रिंसिपलों की समिति ने बीएमएस कोर्स को लेकर शनिवार देर रात अधिसूचना जारी की। अधिसूचना में सिर्फ डीयू के दस कॉलेजों में उपलब्ध बीबीई, तीन कॉलेजों में बीबीएस के बारे में जिक्र है और एक कॉलेज में चल रहे बीएफआईए के बारे में कुछ नहीं कहा गया है।

यह कोर्स सिर्फ शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ बिजनेस स्टडीज में उपलब्ध है और इसमें सत्र 2012-13 में 62 सीटें थीं। ऐसे में प्रिंसिपलों की समिति ने तय किया है कि अगर बीएफआईए कोर्स को मंजूरी मिली तो ठीक है, अन्यथा इसे बंद कर इसकी सीटें अन्य दो कोर्स में बदल दिया जाएगा।

दरअसल, दाखिला प्रक्रिया के निर्धारण के लिए बनी प्रिंसिपलों की समिति ने पाया है कि बीएर्फआईए की मान्यता को लेकर यूजीसी नियमों को टटोलना होगा और जब तक इसे लेकर स्थिति साफ  नहीं होती है तो इसमें दाखिले की घोषणा नहीं की जा सकती।
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ये कैसे अच्छे दिन?

डीयू में चार वर्षीय प्रोग्राम के रोलबैक के विरोध में रविवार को भी प्रदर्शन जारी रहा। रविवार को समर्थन में आए छात्रों ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी के घर के बाहर प्रदर्शन करते हुए इसे फिर से लागू करने की मांग की।

प्रदर्शन करने वालों बीएमएस कोर्स में पढ़ाई कर रहे छात्र व बीटेक कोर्स के छात्र भी शामिल रहे। प्रदर्शनकारियों ने कहा केंद्र सरकार के चुनावी नारा ‘अच्छे दिन आ गए बिन डिग्री’ का स्लोगन बनाकर नारेबाजी की। छात्रों ने मांग की कि चार वर्षीय कोर्स को लागू किया जाए।
 
प्रदर्शनकारी स्मृति ईरानी के नई दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर डीयू में रोलबैक किए गए एफवाईयूपी को वापस करने की मांग की। प्रदर्शन का ही असर रहा कि बी.टेक कोर्स वाले छात्रों को राहत भरी खबर मिल चुकी है, लेकिन अब भी बीएमएस को लेकर सत्र 2013-14 में दाखिला लेने वालों छात्रों का भविष्य असमंजस में है। छात्रों का कहना है कि उन्हें भी बीएमएस की डिग्री चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है कि उनका भविष्य दांव पर लग जाएगा।
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