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2017 से इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में होगा बड़ा बदलाव

Thu, 12 Nov 2015 08:25 AM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
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वर्ष 2017 से इंजीनियरिंग प्रवेश प्रक्रिया में बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। आईआईटी काउंसिल की ओर से की गई सिफारिशों के मुताबिक इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिले से पहले छात्र को एप्टीट्यूड टेस्ट से गुजरना होगा। देश भर से केवल चार लाख छात्र ही एक साल में इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा दे पाएंगे। काउंसिल ने हाल ही में यह सिफारिशें मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजी हैं।
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आईआईटी काउंसिल की ओर से भेजी गई सिफारिशों के मुताबिक वर्ष 2017 की शुरुआत में ही नेशनल टेस्टिंग सर्विस की स्थापना की जाएगी। इसके तहत साल में दो या इससे अधिक बार एप्टीट्यूड टेस्ट का आयोजन किया जाएगा। एप्टीट्यूड टेस्ट में साइंटिफिक एप्टीट्यूड और इनोवेटिव थिंकिंग से जुड़े प्रश्न पूछे जाएंगे।

यह ऑनलाइन टेस्ट होगा, जिसे पास करने वाला ही ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन (जेईई) में शामिल हो पाएगा। साल भर होने वाले ऑनलाइन एप्टीट्यूड टेस्ट से चार लाख छात्रों का चयन जेईई के लिए किया जाएगा। जेईई मेंस या एडवांस के बजाए केवल एक जेईई परीक्षा में यह छात्र शामिल होंगे।
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इस परीक्षा के शीर्ष 40 हजार छात्रों को कॉमन काउंसिलिंग के माध्यम से आईआईटी व एनआईटी में दाखिले का मौका मिलेगा। इंजीनियरिंग विशेषज्ञ डीके मिश्रा ने बताया कि निश्चित तौर पर इससे इंजीनियरिंग के लिए अच्छे युवा सामने आएंगे, जिससे इंजीनियरिंग के गिरते स्तर को नई जान मिलेगी। आईआईटी रुड़की के पूर्व शिक्षक एमके सिंघल के मुताबिक इंजीनियरिंग में इस तरह के परिवर्तन की दरकार है।
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12वीं का नियम दोबारा होगा लागू

तीन साल पहले तक आईआईटी में दाखिले के लिए 12वीं 60 प्रतिशत अंकों का नियम था। फिलहाल 12वीं में 70 प्रतिशत या बोर्ड के टॉप 20 परसेंटाइल में शामिल छात्र को ही आईआईटी में दाखिला मिलता है। वर्ष 2017 से इस नियम में परिवर्तन किया जाएगा।

दोबारा 12वीं में 60 प्रतिशत अंकों वाले छात्र को ही आईआईटी में दाखिले का मौका मिलेगा। इंजीनियरिंग विशेषज्ञ वैभव राय ने बताया कि 12वीं के अंकों की वर्तमान में लागू अनिवार्यता की वजह से कई छात्र ऐसे बोर्ड से 12वीं करने जाने लगे हैं, जहां अच्छी मार्किंग होती है और पढ़ाई भी आसान होती है।

इस बार गत वर्ष जैसी ही होगी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा
आईआईटी काउंसिल की ओर से गठित समिति ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय से वर्ष 2017 के लिए सिंगल टेस्ट और जेईई मेन के लिए बोर्ड परीक्षाओं के अंकों की वेटेज के नियम को खत्म करने की सिफारिश की है।

मगर मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कहा है कि इन सिफारिशों को पहले आम जनता की राय के लिए सार्वजनिक रूप से रखा जाएगा और इसके बाद ही कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा।

हालांकि 2016 की परीक्षा 2015 में ली गई परीक्षा के पैटर्न पर ही ली जाएगी। प्रोफेसर अशोक मिश्रा की अध्यक्षता में गठित प्रतिष्ठित व्यक्तियों की समिति यानी सीईपी ने मंत्रालय को जेईई मेन और एडवांस की बजाय सिंगल टेस्ट लेने की सिफारिश की है।
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