वर्ष 2017 से इंजीनियरिंग प्रवेश प्रक्रिया में बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। आईआईटी काउंसिल की ओर से की गई सिफारिशों के मुताबिक इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिले से पहले छात्र को एप्टीट्यूड टेस्ट से गुजरना होगा। देश भर से केवल चार लाख छात्र ही एक साल में इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा दे पाएंगे। काउंसिल ने हाल ही में यह सिफारिशें मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजी हैं।
आईआईटी काउंसिल की ओर से भेजी गई सिफारिशों के मुताबिक वर्ष 2017 की शुरुआत में ही नेशनल टेस्टिंग सर्विस की स्थापना की जाएगी। इसके तहत साल में दो या इससे अधिक बार एप्टीट्यूड टेस्ट का आयोजन किया जाएगा। एप्टीट्यूड टेस्ट में साइंटिफिक एप्टीट्यूड और इनोवेटिव थिंकिंग से जुड़े प्रश्न पूछे जाएंगे।
यह ऑनलाइन टेस्ट होगा, जिसे पास करने वाला ही ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन (जेईई) में शामिल हो पाएगा। साल भर होने वाले ऑनलाइन एप्टीट्यूड टेस्ट से चार लाख छात्रों का चयन जेईई के लिए किया जाएगा। जेईई मेंस या एडवांस के बजाए केवल एक जेईई परीक्षा में यह छात्र शामिल होंगे।
इस परीक्षा के शीर्ष 40 हजार छात्रों को कॉमन काउंसिलिंग के माध्यम से आईआईटी व एनआईटी में दाखिले का मौका मिलेगा। इंजीनियरिंग विशेषज्ञ डीके मिश्रा ने बताया कि निश्चित तौर पर इससे इंजीनियरिंग के लिए अच्छे युवा सामने आएंगे, जिससे इंजीनियरिंग के गिरते स्तर को नई जान मिलेगी। आईआईटी रुड़की के पूर्व शिक्षक एमके सिंघल के मुताबिक इंजीनियरिंग में इस तरह के परिवर्तन की दरकार है।