कभी सरकरी नौकरी की गारंटी माने जाने वाले बीएड कोर्स से अब छात्रों का मोह भंग हो चुका है।
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हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में बीएड प्रवेश परीक्षा के लिए इस वर्ष मात्र 17 हजार छात्रों ने ही बीएड प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन किया है। पूर्व में यह आंकड़ा 40 हजार से भी अधिक रहता था।
विवि के अधिकारी बीएड से छात्रों का मोह भंग का कारण शिक्षकों के पदों पर विज्ञप्तियों का जारी न होना व टीईटी को मान रहे हैं।
दूसरे राज्यों में बीएड करने जा रहे छात्र
एक जून को गढ़वाल विवि की साढ़े छह हजार सीटों के लिए बीएड प्रवेश परीक्षा आयोजित होनी है। गढ़वाल विवि ने इस प्रवेश परीक्षा के लिए 25 हजार आवेदन पत्र छपवाए थे लेकिन 17 हजार आवेदन पत्र ही बिक पाए।
मालूम हो कि वर्तमान सत्र में भी 50 फीसदी से अधिक सीटें खाली हैं। विवि के परीक्षा ओएसडी प्रो. एलजे सिंह ने कहा कि राज्य से बाहरी विवि में आसानी से बीएड हो जाता है।
इसलिए अधिकांश छात्र हिमाचल, जम्मू कश्मीर राज्यों से बीएड कर रहे हैं।
बीएड को लेकर छात्रों के भीतर डर
साथ ही शिक्षक बनने के लिए बीएड के अलावा टीईटी की बाध्यता से भी बीएड से छात्रों का मोह भंग हो रहा है।
छात्र अविनाश रौतेला, रश्मि चौहान, स्वाति रावत आदि का कहना है कि पहले बीएड करने से शिक्षक बनने की गारंटी होती थी लेकिन अब बीएड करने के बाद टीईटी भी जरूरी हो गया है।
साथ ही उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालय धीरे-धीरे बंद हो रहे हैं। ऐसे में बीएड करने से भविष्य सुरक्षित नहीं रह गया है। अब बीएड के बजाय कोई अन्य व्यवसायिक कोर्स करना बेहतर है।
गढ़वाल विवि की एक जून को आयोजित होने वाली बीएड प्रवेश परीक्षा के लिए विवि ने 35 परीक्षा केंद्र बनाए हैं। विवि के कुलसचिव प्रो. पीएस राणा ने बताया कि यदि किसी कारण से अभ्यर्थी को प्रवेश पत्र नहीं मिलता है तो अभ्यर्थी विवि की वेबसाइट से भी प्राप्त कर सकते हैं।
इसके अलावा गढ़वाल विवि के बिड़ला परिसर, बादशाहीथौल परिसर, पौड़ी परिसर, गोपेश्वर, तलवाड़ी, गैरसैण, कर्णप्रयाग, अगस्त्यमुनी, वेदीखाल, जयहरीखाल, कोटद्वार, नैनीडांडा, सेंदुल, उत्तरकाशी, बड़कोट, डाकपत्थर, ऋषिकेश, देहरादून, रुड़की, हरिद्वार से प्रवेश पत्र की डुप्लिकेट कॉपी 31 मई तक प्राप्त कर सकते हैं।