बीबीएयू में महंगी फीस भरने के बावजूद स्टूडेंट्स को सुविधाओं और क्वॉलिटी एजूकेशन दोनों से वंचित रहना पड़ता है। दूसरी ओर, टीचर्स को स्टूडेंट्स के लापरवाही भरे रवैये से हमेशा शिकायत रहती है।
दोनों पक्षों के बीच कम्युनिकेशन गैप होने के कारण स्टूडेंट्स की पढ़ाई और विश्वविद्यालय की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इन सबका समाधान निकालने के लिए बीबीएयू ने पेरेंट्स टीचर्स समिति का गठन किया है।
समिति के गठन के बाद अभिभावक विश्वविद्यालय में शिक्षण और सुविधाओं का ऑडिट कर सकेंगे। समिति की पहली बैठक 26 फरवरी को होने जा रही है।
करोड़ों का सालाना बजट होने के बावजूद बीबीएयू अभी तक अपनी स्थापना के उद्देश्यों पर पूरी तरह से खरा नहीं उतर पाया है।
यहां तक कि कैग (कांपोट्रेलर ऑडिटर जनरल) ने भी अपनी ऑडिट रिपोर्ट में बीबीएयू को इसकी स्थापना के उद्देश्यों को पूरा नहीं कर पाने की बात लिखी है।
रिपोर्ट के बाद शैक्षणिक माहौल सुधारने के लिए विश्वविद्यालय में कई कवायद कीं। अब विश्वविद्यालय शैक्षणिक माहौल सुधारने के लिए एक और पहल करने जा रहा है।
इसके तहत स्टूडेंट्स की फीस भरने वाले अभिभावक अब विश्वविद्यालय में मिलने वाली सुविधाओं और शिक्षण की गुणवत्ता का ऑडिट कर सकेंगे। अभिभावकों की रिपोर्ट के आधार पर विवि शिक्षण और सुविधाओं में सकारात्मक सुधार के लिए कदम उठाएगा।
पेरेंट्स टीचर्स समिति में शिक्षक भी अभिभावकों को स्टूडेंट्स के संबंध में होेने वाली दिक्कतों को बताएंगे। इससे क्लास से गायब रहने वाले स्टूडेंट्स के बारे में टीचर्स अभिभावकों को जानकारी दे पाएंगे।
इस तरह से विश्वविद्यालय में पढ़ाई का माहौल बनेगा। सेल्फ फाइनेंस कोर्सेज पर इसका खासा असर पड़ेगा। फिलहाल, 26 फरवरी को समिति की पहली बैठक का इंतजार किया जा रहा है। उसके बाद आगे की दिशा तय होगी।
बिना शिक्षक शुरू हो गए दो दर्जन कोर्स
हॉस्टल व्यवस्था के साथ ही स्टूडेंट्स की सबसे बड़ी समस्या टीचर्स न होना भी है। शैक्षिक सत्र 2013-14 में विश्वविद्यालय ने 24 नए कोर्स शुरू किए।
इन कोर्सेज की पढ़ाई के लिए स्टूडेंट्स से लाखों रुपये फीस के रूप में भी वसूले गए। एक सेमेस्टर की पढ़ाई और परीक्षा तक हो गई। बिना विशेषज्ञ फैकल्टी के ही कोर्सेज की पढ़ाई जारी है।
कोर्सेज में एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स और उनके अभिभावक दोनों खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।